नेपाल में रैपर से PM बने बालेन शाह के 150 दिन: जिस Gen-Z ने सत्ता तक पहुंचाया, वही अब सड़कों पर क्यों?

Rahul Jadaun 24 Aug 2026 02:19 PM 2 Mins
नेपाल में रैपर से PM बने बालेन शाह के 150 दिन: जिस Gen-Z ने सत्ता तक पहुंचाया, वही अब सड़कों पर क्यों?

काठमांडू: नेपाल की राजनीति में दशकों पुरानी व्यवस्था और पारंपरिक राजनीतिक चेहरों को उखाड़ फेंकने का दावा करने वाले युवा प्रधानमंत्री बालेन्द्र (बालेन) शाह के कार्यकाल के 150 दिन पूरे हो चुके हैं। रैपर से इंजीनियर और फिर काठमांडू के मेयर से सीधे देश की सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने वाले 36 वर्षीय बालेन शाह को युवाओं ('Gen-Z') की क्रांति ने भारी जनादेश दिया था। लेकिन महज पांच महीनों के भीतर उनकी राजनीतिक चमक फीकी पड़ती दिखाई दे रही है और वही युवा पीढ़ी अब उनके फैसलों के खिलाफ काठमांडू की सड़कों पर विरोध जता रही है।

सड़क की लोकप्रियता बनाम सत्ता की जटिलता

बालेन शाह ने नेपाल में 'डिलीवरी-बेस्ड गवर्नेंस' और 100-सूत्रीय सुधार एजेंडे का वादा कर सत्ता संभाली थी। हालांकि, विपक्ष और आंदोलन में रहते हुए आक्रामक रवैया अपनाना आसान होता है, लेकिन सरकार चलाना संस्थागत संतुलन और कूटनीति की मांग करता है। जानकारों का मानना है कि बालेन शाह के इसी प्रशासनिक अनुभव की कमी ने उन्हें कम समय में कई मोर्चों पर उलझा दिया है।

किन बड़े फैसलों और विवादों ने बढ़ाई मुश्किलें?

  1. संसद और पार्टी से बढ़ती दूरी:

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह की संसद और अपनी ही पार्टी 'राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी' (RSP) के नेताओं से दूरी बढ़ने लगी है। पार्टी के आंतरिक तालमेल में खटास और सार्वजनिक संवाद से बचने की नीति ने उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  2. सीमावर्ती व्यापार और कस्टम नियमों का झटका:

    भारत से सटे सीमावर्ती इलाकों में दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर अचानक कड़े सीमा शुल्क और नियम लागू करने के फैसले से आम नागरिकों में भारी असंतोष फैल गया। जरूरी सामानों की कीमतों में उछाल के बाद सरकार को अपने फैसलों पर बैकफुट पर आना पड़ा।

  3. बस्ती हटाने और स्थानीय विवाद:

    काठमांडू और आसपास के इलाकों में बिना उचित पुनर्वास के झुग्गी-झोपड़ियों और अनौपचारिक बस्तियों को हटाने की कोशिशों के बाद स्थानीय जनता और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

  4. कूटनीतिक पेच और सुरक्षा चुनौतियां:

    भारत और चीन के साथ कूटनीतिक संतुलन बनाने में शुरुआती असमंजस और प्रोटोकॉल से जुड़े मुद्दों पर भी शाह सरकार की आलोचना हुई। हाल ही में सेना और भर्ती से जुड़े मुद्दों को लेकर भी युवाओं का गुस्सा देखने को मिला है।

आगे का रास्ता: क्या संभलेगी स्थिति?

नेपाल के इतिहास में सबसे कम उम्र के राष्ट्राध्यक्ष बनकर उभरे बालेन शाह के लिए यह दौर सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा साबित हो रहा है। लोकप्रियता के रथ पर सवार होकर सत्ता तक पहुंचना जितना तेज था, सत्ता के कठिन निर्णयों के बीच उस विश्वास को बनाए रखना उतना ही चुनौतीपूर्ण बन गया है। यदि सरकार ने जल्द ही संस्थागत संवाद, कूटनीतिक परिपक्वता और जनसमस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो नेपाल की राजनीति में आया यह बड़ा बदलाव एक और संकट का रूप ले सकता है।

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