अयोध्या: भगवान श्रीराम के मंदिर से चोरी करने वालों की मुसीबतें अभी कम नहीं होंगी। ट्रस्ट के नए महासचिव बने कृष्ण मोहन दास ने ऐलान कर दिया है, किसी भी चोर को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। सबसे पहले तो अयोध्या पुलिस ने चढ़ावा चोरी के तीन आरोपियों लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडेय को पुलिस ने 40 घंटे की रिमांड पर ले लिया है। ये वही लोग हैं जो CCTV में चढ़ावा चोरी करते दिखे थे। ये लोग चढ़ावे के पैसे अपनी जेब में रखते हुए कैमरे में कैप्चर हुए थे। अब पुलिस ने इन्हें 40 घंटे की रिमांड पर ले लिया है। सुबह 7 बजकर 36 मिनट पर पुलिस फैजाबाद जेल पहुंचती है, जहां से आरोपियों को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन जाती है। अब इस 40 घंटे के समय में ही इनसे पूरा सच उगलवाने की कोशिश रहेगी। इन चोरों से पूछा नए जाएगा कि चोरी करने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड कौन है?
नए महासचिव बोले- चोरों को कड़ी सजा मिलेगी
अयोध्या धाम जैसी पवित्र जगह पर चोरी करने वालों को उनके कर्मों की कड़ी सजा मिलेगी, हम हर हाल में इन चोरों को सजा दिलवाइएंगे- ये बात ट्रस्ट के नए महासचिव बने कृष्ण मोहन दास ने कही हैं, उन्होंने मंगलवार को अपने पद की जिम्मेदारी संभालते ही मंदिर में चोरी करने वालों पर बयान दिया. नए महासचिव ने SBI बैंक के अधिकारियों से भी इस बार में बात की है।
एकांतवास में पहुंचे चंपत राय
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय एकांतवास में पहुंच चुके हैं। वो राम मंदिर के पास ही रामकोट स्थित तीर्थ क्षेत्र पुरम में एकांतवास कर रहे हैं। जहां उनसे मिलने के लिए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि भी पहुंचे थे। इससे पहले ही चंपत राय एक लेटर जारी कर अपनी सफाई भी पेश कर चुके हैं। इसी लेटर में उन्होंने श्रीरामचरितमानस की एक चौपाई भी लिखी थी। ‘धीरज धर्म मित्र अरु नारी, आपद काल परिखिअहिं चारी’।
विपक्ष अभी भी उठा रहा सवाल
ट्रस्ट की जो मीटिंग हुई है, चोरों पर जो एक्शन हुआ है उस सबको विपक्ष ने बेमतलब करार दिया है। समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने तो साफ शब्दों में कहा है कि सिर्फ नौकरों पर FIR दर्ज हुई है, जो असली जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं हुआ। जबकि कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा है कि “सुप्रीम कोर्ट के आदेश और जनता के पैसे से मंदिर बना। कोई पैसा विश्व हिंदू परिषद, सरकार या संघ ने तो नहीं लगाया? फिर आप ट्रस्ट में अपने लोग क्यों चाहते हैं? आपका इसमें स्वार्थ क्या है? जो अयोध्या के साधु-संत है वे ट्रस्ट चलाएं, या शंकराचार्य या रामानुज संप्रदाय के जो संत हैं, वे ट्रस्ट चलाएं।”
हालांकि SIT ने चंपत राय को क्लीन चिट दे दी है, लेकिन सवाल अब भी वही है अगर इतने समय से चोरी चल रही थी तो किसी को भनक क्यों नहीं लगी? कुल कितनी चोरी हुई? असली जिम्मेदार कौन? क्या रामभक्तों की श्रद्धा के साथ न्याय होगा या नहीं?