लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने कड़े तेवरों और भूमाफियाओं के खिलाफ 'बुलडोजर एक्शन' को लेकर हमेशा चर्चा में रहते हैं। हाल ही में सीएम योगी ने बीते कुछ दिनों में दूसरी बार यूपी के एक ऐसे ही बेहद रसूखदार और शातिर भूमाफिया का जिक्र किया है, जिसकी कभी पूरे सिस्टम पर तूती बोलती थी। यह उस दौर की कहानी है जब लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बेशकीमती जमीनों पर उस माफिया का साम्राज्य हुआ करता था। वह माफिया इतना ताकतवर था कि पुलिस प्रशासन भी उससे टकराने से डरता था। पीड़ित लोग मुकदमा दर्ज कराने के बजाय अपनी जमीनें चुपचाप उसके नाम कर देते थे। तत्कालीन डीजीपी तक की यह हिम्मत नहीं होती थी कि वे हजारों जवानों को साथ ले जाकर उस पर हाथ डाल सकें, क्योंकि वह पूरा सिस्टम अपनी जेब में लेकर घूमता था।
अखिलेश राज में बेअसर था सिस्टम, ट्रेनिंग एकेडमी की जमीन पर कर लिया था कब्जा
यह पूरा खेल उस समय धड़ल्ले से चल रहा था जब पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लखनऊ के सीएम आवास में रहा करते थे। चूंकि वह भूमाफिया समाजवादी पार्टी (सपा) के एक पूर्व कद्दावर मंत्री का बेहद करीबी बिल्डर था, इसलिए राजनीतिक रसूख के आगे तब का प्रशासन पूरी तरह नतमस्तक था। यह बिल्डर इतना शातिर था कि उसने पुलिस ट्रेनिंग एकेडमी (Police Training Academy) की सरकारी जमीन को ही कागजों में हेरफेर करके कब्रिस्तान और मस्जिद के नाम दर्ज करवा लिया। साथ ही सरकारी दस्तावेजों में यह भी लिखवा दिया कि इसके आजीवन मुत्तवल्ली (निगरानीकर्ता) खुर्शीद आगा हैं। जब यह गंभीर मामला मीडिया की सुर्खियों में आया, तो तत्कालीन जिलाधिकारी (DM) कौशल राज शर्मा ने, जिनकी गिनती सूबे के बेहद ईमानदार और तेजतर्रार अधिकारियों में होती है, इस पूरे मामले की गोपनीय जांच बैठाई।
रेवेन्यू बोर्ड से लेकर हाई कोर्ट तक हारा माफिया, 2017 में बदला खेल
साल 2017 में उत्तर प्रदेश की सत्ता बदली और योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की कमान संभालते ही सूबे के सभी भूमाफियाओं को जमीनों पर से अवैध कब्जा छोड़ने का 24 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम दे दिया। हालांकि, राजनीतिक संरक्षण में पले-बढ़े उस शातिर बिल्डर ने शुरुआत में झुकने से साफ इनकार कर दिया। डीएम कौशल राज शर्मा की जांच रिपोर्ट के आधार पर जब प्रशासन ने एक्शन शुरू किया, तो बौखलाया हुआ भूमाफिया रेवेन्यू बोर्ड पहुंच गया। वहां दाल न गलने पर उसने सीधे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन योगी सरकार की मजबूत पैरवी के आगे उसकी एक न चली और आखिरकार हाई कोर्ट से भी उसे करारा झटका लगा। इसके बाद 'बुलडोजर बाबा' के खौफ और कानूनी डंडे के आगे उस माफिया को घुटने टेकने पड़े और उसने चुपचाप सरेंडर कर दिया।
आज उसी जमीन पर खड़ा है 'स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट', अब तक 64 हजार एकड़ मुक्त
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस दिलचस्प किस्से का जिक्र करते हुए बताया कि एक पूर्व डीजीपी ने अपने रिटायरमेंट के वक्त उनसे इस जमीन का मुद्दा उठाया था, जिस पर योगी ने मुस्कुराते हुए कहा था कि 'ये तो मेरा प्रिय विषय है।' आज जिस सरकारी जमीन पर माफिया का अवैध कब्जा था, वहां उत्तर प्रदेश का अत्याधुनिक 'स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट' (UP Institute of Forensic Sciences) बनकर पूरी तरह तैयार है। योगीराज में अब तक पूरे प्रदेश में करीब 64 हजार एकड़ सरकारी और निजी जमीन को भूमाफियाओं के अवैध चंगुल से मुक्त कराया जा चुका है। प्रयागराज और मऊ जैसे जिलों में मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसे कुख्यात माफियाओं के कब्जे से छुड़ाई गई जमीनों पर आज योगी सरकार गरीबों के लिए आलीशान सरकारी आवास बनाकर उन्हें सौंप रही है।