यूरोप के सबसे विकसित और शांत माने जाने वाले देशों में शामिल डेनमार्क एक बार फिर अजान को लेकर चर्चा में है। डेनमार्क सरकार अब इस बात की समीक्षा कर रही है कि क्या देशभर में मस्जिदों से लाउडस्पीकर के जरिए दी जाने वाली अजान पर रोक लगाई जा सकती है या नहीं। इस मुद्दे को डेनमार्क के इमिग्रेशन एंड इंटीग्रेशन मंत्री मोर्टन बोडस्कोव के बयान ने और बड़ा बना दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोर्टन बोडस्कोव ने कहा है कि डेनमार्क की छतों के ऊपर अजान की आवाज नहीं गूंजनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि डेनमार्क में चलते हुए किसी व्यक्ति को यह भ्रम नहीं होना चाहिए कि वह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के किसी इलाके में पहुंच गया है। उनके इस बयान के बाद डेनमार्क से लेकर पाकिस्तान और भारत तक बहस तेज हो गई है।
डेनमार्क की कुल आबादी करीब 60 लाख के आसपास है। इनमें मुस्लिम आबादी लगभग 2 लाख 70 हजार बताई जाती है। दावा किया जाता है कि डेनमार्क में मुसलमान सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय बन चुके हैं। देश में करीब 100 मस्जिदें होने की बात भी कही जाती है। इसी पृष्ठभूमि में अजान, धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक आवाजों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
मंत्री बोडस्कोव का तर्क है कि डेनमार्क में सार्वजनिक जगहों पर “इस्लामीकरण” का असर बढ़ता दिख रहा है और सरकार इस पर सख्त रुख अपनाना चाहती है। उनका कहना है कि मस्जिद के भीतर नमाज पढ़ना धार्मिक अधिकार का हिस्सा हो सकता है, लेकिन लाउडस्पीकर से बाहर तक आवाज पहुंचाना सार्वजनिक व्यवस्था और स्थानीय पहचान से जुड़ा सवाल है।
हालांकि यह पहली बार नहीं है जब डेनमार्क में अजान पर रोक की बात उठी हो। इससे पहले भी 2020 और 2025 के दौरान इस तरह की कोशिशों की चर्चा हुई थी, लेकिन वे आगे नहीं बढ़ पाईं। कई इलाकों में स्थानीय स्तर पर शोर-शराबे से जुड़े नियमों के कारण लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर पहले से सीमाएं हैं। कोपेनहेगन की ग्रैंड मस्जिद को देश की बड़ी मस्जिदों में गिना जाता है, लेकिन वहां भी लाउडस्पीकर से बाहर अजान नहीं दी जाती।
अब सरकार इस बात की कानूनी जांच कर रही है कि संविधान में मिली धार्मिक स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए पूरे देश में ऐसी रोक लगाई जा सकती है या नहीं। समर्थकों का कहना है कि सार्वजनिक जगहों पर किसी भी धर्म की तेज आवाज को सीमित किया जाना चाहिए, जबकि विरोधियों का तर्क है कि यह फैसला एक खास समुदाय को निशाना बनाने जैसा दिख सकता है।
इस बहस की चर्चा भारत में भी हो रही है। भारत में अजान पर बैन तो नहीं है, लेकिन कई राज्यों में लाउडस्पीकर की आवाज को लेकर प्रशासनिक आदेश जारी किए जा चुके हैं। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों की आवाज तय सीमा में रखने के निर्देश दिए थे। अब डेनमार्क की बहस ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि धार्मिक आजादी और सार्वजनिक शांति के बीच सीमा कहां तय होनी चाहिए।