नई दिल्ली: गुरुवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ. स्थिति यहां तक बन गई कि बीजेपी विधायक को निलंबित तक दिया गया. सत्तारूढ़ टीएमसी और विपक्षी भाजपा के विधायकों के नारेबाजी करने पर हंगामा हुआ. सदन में बंगाली प्रवासियों पर कथित अत्याचारों से संबंधित एक सरकारी प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी. यह व्यवधान तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रस्ताव पर बोलने वाली थीं.
भाजपा विधायकों ने नारेबाजी की और 2 सितंबर को विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के निलंबन पर सवाल उठाए, जिसके बाद सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया. सदन को संबोधित करते हु ममता बनर्जी ने भाजपा पर बांग्ला भाषी लोगों के खिलाफ होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "मैं बंगालियों पर हो रहे अत्याचार के लिए भाजपा की निंदा करती हूं. जल्द ही एक समय आएगा जब बंगाल में भाजपा का एक भी विधायक नहीं बचेगा. जनता खुद यह सुनिश्चित करेगी. भाजपा की हार निश्चित है, क्योंकि बंगालियों के खिलाफ भाषाई आतंक फैलाने वाली कोई भी पार्टी बंगाल नहीं जीत सकती."
ममता बनर्जी ने कहा, "भाजपा वोट चोर, आमूल-चूल भ्रष्ट, बंगालियों को सताने वाली और धोखेबाज़ी में माहिर पार्टी है. इतना ही नहीं ममता बनर्जी ने भाजपा राष्ट्रीय कलंक है और मैं उनकी कड़े शब्दों में निंदा करती हूं." मुख्यमंत्री ने भाजपा पर भाजपा शासित राज्यों में बंगाली प्रवासी मज़दूरों पर कथित हमलों पर चर्चा रोकने का भी आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया, "भाजपा बंगाली प्रवासियों पर हमलों पर चर्चा के ख़िलाफ़ क्यों है? ऐसा इसलिए है क्योंकि ये घटनाएं पार्टी शासित राज्यों में हो रही हैं. वे सच्चाई को दबाना चाहते हैं."
लगातार नारेबाजी के बीच बनर्जी ने पूछा, "भाजपा मुझे इस सदन में बोलने क्यों नहीं दे रही है?" उन्होंने आगे कहा, "हम हिंदी या किसी अन्य भाषा के ख़िलाफ़ नहीं हैं, लेकिन भाजपा स्पष्ट रूप से बंगाली विरोधी है. उनका रवैया औपनिवेशिक और तानाशाही मानसिकता दर्शाता है. वे पश्चिम बंगाल को अपना उपनिवेश बनाना चाहते हैं." विरोध प्रदर्शन जारी रहने पर, स्पीकर बिमान बनर्जी ने अव्यवस्था फैलाने के आरोप में भाजपा के मुख्य सचेतक शंकर घोष को पूरे दिन के लिए निलंबित कर दिया. जब घोष ने जाने से इनकार कर दिया, तो विधानसभा मार्शलों को बुलाया गया और उन्हें सदन से बाहर खींच लिया गया.
बाद में, हंगामा बढ़ने पर भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल, मिहिर गोस्वामी, बंकिम घोष और अशोक डिंडा को निलंबित कर दिया गया. भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया कि हंगामे के दौरान सत्ता पक्ष की ओर से उन पर पानी की बोतलें फेंकी गईं. दोनों पक्षों के बीच किसी भी तरह की झड़प को रोकने के लिए मार्शल सदन के अंदर तैनात रहे. बनर्जी ने भाजपा विधायकों के आचरण की आलोचना करते हुए कहा कि वे बंगाली प्रवासियों की स्थिति पर चर्चा को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे थे.
बंगाल की सीएम ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के वैचारिक पूर्वजों ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश के साथ विश्वासघात किया था. उन्होंने कहा, "भाजपा तानाशाहों की पार्टी है. उनके पूर्वजों ने भारत की आजादी के लिए लड़ाई नहीं लड़ी; उन्होंने देश के साथ विश्वासघात किया." जैसे-जैसे बहस बढ़ती गई, सत्ता पक्ष के कुछ विधायक विपक्षी बेंचों की ओर बढ़ गए, जिससे मार्शलों को हस्तक्षेप करना पड़ा.
हंगामे के कारण बनर्जी को अपना भाषण कुछ देर के लिए रोकना पड़ा. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार सरकार ने विदेशी ताकतों के सामने भारत की प्रतिष्ठा बेच दी और दावा किया कि केंद्र कभी अमेरिका के सामने तो कभी चीन के सामने भीख मांग रहा है. इस बीच, सदन में सीएम ममता बनर्जी के संबोधन का जवाब देते हुए पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष और भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "उन्होंने मोदी समुदाय को गाली दी... ममता बनर्जी को जाना होगा. उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा." हंगामे के बावजूद सदन की कार्रवाई स्थगित नहीं हुई.