Ashwini Choubey chair controversy: कुर्सी की वजह से राजनाथ के मंच पर घमासान, अश्विनी चौबे हुए नाराज, मंच से लौटे वापस, चुनाव से पहले बिहार में कलह!

Rahul Jadaun 03 Jul 2025 04:40: PM 2 Mins
Ashwini Choubey chair controversy: कुर्सी की वजह से राजनाथ के मंच पर घमासान, अश्विनी चौबे हुए नाराज, मंच से लौटे वापस, चुनाव से पहले बिहार में कलह!
  • पटना दौरे पर पहुंचे राजनाथ सिंह, मंच पर कुर्सी पड़ गई कम या लगाई ही नहीं गई ?
  • अश्विनी चौबे मंच से गुस्सा होकर लौटे, भरी सभा छोड़कर निकले तो उठने लगे सवाल

Ashwini Choubey chair controversy: बिहार की राजधानी पटना में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह बीजेपी नेताओं को जीत का मंत्र देने गए थे, लेकिन वहां कुछ ऐसा हुआ जिसने ये सवाल खड़े कर दिए कि क्या बिहार बीजेपी में सबकुछ ठीक चल रहा है? और क्या क्षत्रियों को साधने के लिए आयोजित हुआ राजनाथ सिंह का कार्यक्रम ब्राह्मणों की नाराजगी बढ़ा देगा? क्योंकि इस कार्यक्रम से जो तस्वीरें आईं, वो कई संकेत दे रही है. पूर्व सांसद अश्विनी चौबे मंच पर पहुंचते हैं, पहले दूसरी तरफ जाकर कुर्सी की ओर देखते हैं, फिर दूसरी ओर देखते हैं, वहां मौजूद नेताओं से बातचीत करते हैं और फिर मंच से तेज कदमों से उतरते हैं, और सीधा बाहर निकलने लगते हैं, बाहर मौजूद पत्रकार उनसे जब पूछने की कोशिश करते हैं, क्या नाराज हैं तो कहते हैं

मैं आ रहा हूं. एक मीटिंग है बगल में. पूरी जगह है. पूरा हॉल हमारे लिए हैं. हमारा सनातन महाकुंभ का कार्यक्रम है. मैं उसमें जा रहा हूं. उसके बाद से मैं फिर आऊंगा.

हालांकि उसके बाद शाम को वो एक प्रेस कॉन्फ्रेंस शामिल होते हैं. और उसके बाद जो बयान देते हैं, उससे बिहार बीजेपी में सबकुछ ठीक न होने की चर्चा शुरू होने लगती है. वो शाम को कहते हैं

मेरी पार्टी से कोई नाराजगी नहीं है। हां कभी-कभी व्यवस्था से नाराजगी होती है। पार्टी तो मेरी मां है। मैं वहां राजनाथ सिंह जी से भी मिला

मतलब अश्विनी चौबे के दिल में इस बात की टीस है कि मंच पर उन्हें कुर्सी नहीं मिली, अब उनकी गिनती तो बिहार बीजेपी के बड़े नेताओं में होती है, लेकिन मौजूदा सियासत के हिसाब से वो कितने फिट बैठते हैं, उनकी कितनी जरूरत पार्टी को है, वो अपनी छवि के जरिए कितना वोट जुटा पाएंगे, ये सारे सियासी समीकऱण भी देखे जाते हैं. अश्विनी चौबे भले ही कुर्सी न मिलने की वजह से नाराज हों, पर बिहार बीजेपी में सबकुछ ठीक होने का दावा किया जा रहा है. राजनाथ सिंह जिस कार्यक्रम में पहुंचे थे

  • उस बैठक का मुख्य एजेंडा बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी रहा
  • नरेन्द्र मोदी सरकार की 11 साल की उपलब्धियां जनता तक पहुंचाना रहा
  • बैठक में इसकी एक विस्तृत रणनीति बनी,गठबंधन की भूमिका पर भी चर्चा हुई
  • 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बूथ सशक्तिकरण कार्यक्रम बिहार में चलाया जाएगा
  • कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण, संपर्क अभियान और संगठनात्मक मजबूती प्रोग्राम होगा

गृहमंत्री शाह ने इससे पहले बिहार दौरे के दौरान मिशन 225 का टारगेट दिया था, कुल 243 में से 225 सीटें एनडीए को जीताने का लक्ष्य रखा गया है, हालांकि सीटों के बंटवारे के बाद ही ये तय होगा कि कौन कितनी सीटों पर लड़ेगा औऱ कितनी सीटें जीतेगा. लेकिन अश्विनी चौबे की कुर्सी मंच पर न होने की जो तस्वीर सामने आई है, उसने कई तरीके के सवालों को जन्म दे दिया है. चूंकि कांग्रेस ब्राह्मणों को लुभाने में लगी है, और उसने कई ऐसे कार्ड खेले हैं, जिससे बीजेपी से सवर्ण वोटर्स छिटक सकते हैं.

  • साल 2023 में कांग्रेस ने बिहार के 38 में से 25 जिलाध्यक्ष सवर्ण समुदाय से बनाए
  • इनमें 12 भूमिहार, 8 ब्राह्मण, 6 राजपूत हैं, जबकि राहुल गांधी OBC-OBC करते रहते हैं
  • कन्हैया कुमार के सहारे मिथिलांचल और बाकी क्षेत्रों के युवा भूमिहार और ब्राह्मणों पर नजर है

यही वजह है कि अश्विनी चौबे की ये तस्वीर जब सामने आई तो सबने अपने-अपने हिसाब से विश्लेषण किया, जबकि सच्चाई ये भी है कि मंच पर किन्हें बैठना है, और कहां बैठना है ये पहले से तय होता है. फिर ये कंफ्यूजन क्यों हुआ, ये बड़ा सवाल है.

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