Ashwini Choubey chair controversy: बिहार की राजधानी पटना में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह बीजेपी नेताओं को जीत का मंत्र देने गए थे, लेकिन वहां कुछ ऐसा हुआ जिसने ये सवाल खड़े कर दिए कि क्या बिहार बीजेपी में सबकुछ ठीक चल रहा है? और क्या क्षत्रियों को साधने के लिए आयोजित हुआ राजनाथ सिंह का कार्यक्रम ब्राह्मणों की नाराजगी बढ़ा देगा? क्योंकि इस कार्यक्रम से जो तस्वीरें आईं, वो कई संकेत दे रही है. पूर्व सांसद अश्विनी चौबे मंच पर पहुंचते हैं, पहले दूसरी तरफ जाकर कुर्सी की ओर देखते हैं, फिर दूसरी ओर देखते हैं, वहां मौजूद नेताओं से बातचीत करते हैं और फिर मंच से तेज कदमों से उतरते हैं, और सीधा बाहर निकलने लगते हैं, बाहर मौजूद पत्रकार उनसे जब पूछने की कोशिश करते हैं, क्या नाराज हैं तो कहते हैं
“मैं आ रहा हूं. एक मीटिंग है बगल में. पूरी जगह है. पूरा हॉल हमारे लिए हैं. हमारा सनातन महाकुंभ का कार्यक्रम है. मैं उसमें जा रहा हूं. उसके बाद से मैं फिर आऊंगा.”
हालांकि उसके बाद शाम को वो एक प्रेस कॉन्फ्रेंस शामिल होते हैं. और उसके बाद जो बयान देते हैं, उससे बिहार बीजेपी में सबकुछ ठीक न होने की चर्चा शुरू होने लगती है. वो शाम को कहते हैं
“मेरी पार्टी से कोई नाराजगी नहीं है। हां कभी-कभी व्यवस्था से नाराजगी होती है। पार्टी तो मेरी मां है। मैं वहां राजनाथ सिंह जी से भी मिला”
मतलब अश्विनी चौबे के दिल में इस बात की टीस है कि मंच पर उन्हें कुर्सी नहीं मिली, अब उनकी गिनती तो बिहार बीजेपी के बड़े नेताओं में होती है, लेकिन मौजूदा सियासत के हिसाब से वो कितने फिट बैठते हैं, उनकी कितनी जरूरत पार्टी को है, वो अपनी छवि के जरिए कितना वोट जुटा पाएंगे, ये सारे सियासी समीकऱण भी देखे जाते हैं. अश्विनी चौबे भले ही कुर्सी न मिलने की वजह से नाराज हों, पर बिहार बीजेपी में सबकुछ ठीक होने का दावा किया जा रहा है. राजनाथ सिंह जिस कार्यक्रम में पहुंचे थे
गृहमंत्री शाह ने इससे पहले बिहार दौरे के दौरान मिशन 225 का टारगेट दिया था, कुल 243 में से 225 सीटें एनडीए को जीताने का लक्ष्य रखा गया है, हालांकि सीटों के बंटवारे के बाद ही ये तय होगा कि कौन कितनी सीटों पर लड़ेगा औऱ कितनी सीटें जीतेगा. लेकिन अश्विनी चौबे की कुर्सी मंच पर न होने की जो तस्वीर सामने आई है, उसने कई तरीके के सवालों को जन्म दे दिया है. चूंकि कांग्रेस ब्राह्मणों को लुभाने में लगी है, और उसने कई ऐसे कार्ड खेले हैं, जिससे बीजेपी से सवर्ण वोटर्स छिटक सकते हैं.
यही वजह है कि अश्विनी चौबे की ये तस्वीर जब सामने आई तो सबने अपने-अपने हिसाब से विश्लेषण किया, जबकि सच्चाई ये भी है कि मंच पर किन्हें बैठना है, और कहां बैठना है ये पहले से तय होता है. फिर ये कंफ्यूजन क्यों हुआ, ये बड़ा सवाल है.