पटना : बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने और पेपर लीक माफिया पर पूरी तरह नकेल कसने के लिए नीतीश सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया है। बिहार के उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में अब किसी भी परीक्षा का पेपर लीक करना या उसमें किसी तरह की धांधली करना सामान्य अपराध नहीं, बल्कि 'संगठित अपराध' (Organized Crime) की श्रेणी में माना जाएगा।
सरकार के इस कदम का सीधा मकसद राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले भू-माफिया और परीक्षा माफिया के नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकना है।
उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि सरकार राज्य में एक नया और बेहद कड़ा 'बिहार संगठित अपराध नियंत्रण कानून' (Anti-Paper Leak & Organized Crime Act) लागू करने जा रही है। इस नए कानून के तहत:
गैर-जमानती अपराध: पेपर लीक और परीक्षा धांधली में शामिल पाए जाने वाले आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी होगी और उन्हें आसानी से जमानत नहीं मिल सकेगी।
संपत्ति होगी जब्त: संगठित गिरोह चलाकर पेपर लीक कराने वाले माफियाओं की अवैध रूप से अर्जित संपत्ति को कुर्क (Seize) और जब्त किया जाएगा।
भारी जुर्माना और जेल: दोषियों को 10 साल तक की कठोर कैद और करोड़ों रुपये तक के आर्थिक दंड का प्रावधान किया जा रहा है।
सम्राट चौधरी ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, "बिहार के युवा दिन-रात मेहनत करके सरकारी नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। कुछ मुट्ठी भर माफिया पैसों के लालच में उनका हक मारते हैं। अब बिहार में माफिया राज का खात्मा होगा। जो भी इस अपराध में शामिल पाया जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।"
हाल के दिनों में NEET-UG और अन्य राज्यस्तरीय परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों के बाद बिहार सरकार के इस फैसले को बड़ा प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है। विशेष कार्यबल (STF) और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को ऐसे गिरोहों पर सीधे बुलडोजर और कुर्की की कार्रवाई करने के कड़े अधिकार दिए जा रहे हैं।