दतिया: भाजपा के लिए दतिया उपचुनाव टिकट का फैसला भारी पड़ गया है. पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट न दिए जाने से समर्थकों में भारी रोष फैल गया. टिकट की घोषणा होते ही पार्टी संगठन में इस्तीफों की झड़ी लग गई, बाजार बंद हो गए और झांसी हाईवे पर चक्का जाम कर दिया गया, जिससे 25 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया. दतिया जिला भाजपा अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा ने समर्थकों के साथ सामूहिक इस्तीफा देते हुए चेतावनी दी.
उन्होंने कहा है कि 24 घंटे के अंदर नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया गया तो वे पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे देंगे. उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष, बड़ौनी पंचायत पदाधिकारियों, सभी पार्षदों और मोर्चा अध्यक्षों समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ त्यागपत्र सौंपा. इस फैसले से दतिया नगरपालिका अब पार्षद विहीन हो गई है.
इसी बीच प्रशासन ने विरोध प्रदर्शन उग्र रूप लेता देख प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर तुरंत एक्शन लिया. जिलाधिकारी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है. इसके तहत बिना अनुमति के किसी भी प्रकार की जनसभा, जुलूस, प्रदर्शन या पांच या अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है. साथ ही सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने पर भी सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
वर्तमान में दतिया में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं. किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर है. यह फैसला भाजपा के अंदरूनी कलह को उजागर करता है और उपचुनाव को और रोचक बना दिया है. अब देखना होगा कि पार्टी इस विरोध को कैसे संभालती है और आशुतोष तिवारी अपना चुनावी अभियान कैसे आगे बढ़ाते हैं.
समर्थकों का गुस्सा फूटा
नरोत्तम मिश्रा के समर्थक और स्थानीय व्यापारियों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने "भाजपा मुर्दाबाद" के नारे लगाए और चेतावनी दी कि अगर फैसला वापस नहीं लिया गया तो भोपाल तक मार्च निकाला जाएगा. कई दुकानदारों ने स्वतः ही अपनी दुकानें बंद कर नाराजगी जताई.
कौन हैं नया उम्मीदवार आशुतोष तिवारी?
भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को टिकट दिया है. तिवारी लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय हैं. वे पूर्व संभागीय संगठन मंत्री और मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन (कैबिनेट मंत्री दर्जा) रह चुके हैं. 2023 के चुनाव में उन्होंने सेंवढ़ा सीट से टिकट की दावेदारी की थी.
मिश्रा चुनावी तैयारियों में जुटे थे
उपचुनाव की घोषणा के बाद नरोत्तम मिश्रा लगातार जनसभाएं कर रहे थे, पिछली हार के लिए जनता से माफी मांग रहे थे और नामांकन पत्र भी खरीद चुके थे. नामांकन दाखिल करने की तैयारी चल रही थी, लेकिन अचानक टिकट कटने से पूरा समीकरण बिगड़ गया. पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह फैसला "एकतरफा और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा" वाला है. फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और भाजपा नेतृत्व इस बिगड़ते हालात पर नजर बनाए हुए है.