नई दिल्ली: रमजान के पवित्र महीने में गुलमर्ग में आयोजित एक फैशन शो ने जम्मू-कश्मीर में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. भाजपा ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर आरोप लगाया कि जिस होटल में यह कार्यक्रम हुआ, उसका मालिकाना हक उनके परिवार के सदस्यों के पास है. वहीं उमर ने स्पष्ट किया कि यह एक निजी समारोह था, जिसमें सरकार की कोई भागीदारी नहीं थी. पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी इस कार्यक्रम की आलोचना की और इसे "निंदनीय" और कश्मीरी मूल्यों पर हमला बताया.

जम्मू-कश्मीर में विपक्ष के नेता और भाजपा विधायक सुनील शर्मा ने मुख्यमंत्री के इस दावे को सीधे तौर पर चुनौती दी कि उन्हें इस कार्यक्रम के बारे में जानकारी नहीं थी. शर्मा ने कहा, "उमर अब्दुल्ला विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों जगह झूठ बोलते हैं. यह कैसे संभव है कि इतना बड़ा समारोह आपके रिश्तेदारों के स्वामित्व वाले होटल में हो रहा था और आपको इसकी जानकारी नहीं थी? आपने ही इस कार्यक्रम का आयोजन किया होगा. अब जब लोगों ने इस मुद्दे को उठाया है, तो आप दावा कर रहे हैं कि जांच कराई जाएगी. उन्हें झूठ बोलने के बजाय सच को स्वीकार करना चाहिए."

उन्होंने कहा कि आबकारी विभाग ने इस आयोजन के लिए अल्पकालिक लाइसेंस जारी किया था, जिससे पता चलता है कि अधिकारियों को पहले से इसकी जानकारी थी. फैशन शो के वीडियो और तस्वीरें ऑनलाइन सामने आने के बाद विवाद शुरू हो गया, जिससे पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया. पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती ने इस आयोजन की निंदा करते हुए इसे "बहुत परेशान करने वाला" बताया.

उन्होंने कहा, "यह निंदनीय है कि निजी होटल मालिकों को इन आयोजनों के माध्यम से ऐसी अश्लीलता को बढ़ावा देने की अनुमति दी जाती है, जो हमारे सांस्कृतिक मूल्यों का घोर उल्लंघन करती है. सरकार इसे निजी मामला बताकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती." धार्मिक नेताओं ने भी अपना असंतोष व्यक्त किया. कश्मीर के मुख्य पुजारी मीरवाइज उमर फारूक ने इस आयोजन की कड़ी निंदा करते हुए इसे "अपमानजनक" बताया और कहा कि "पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर अश्लीलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी." उनकी टिप्पणियों ने धार्मिक और राजनीतिक समूहों के बीच व्यापक आक्रोश को प्रतिध्वनित किया, जिन्होंने इस आयोजन को कश्मीरी परंपराओं का अपमान माना.

जवाब में, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा को आश्वासन दिया कि जांच के आदेश दिए गए हैं और दोहराया कि उनकी सरकार वर्ष के किसी भी समय इस तरह के आयोजन की अनुमति नहीं देगी. अब्दुल्ला ने कहा, "यह एक निजी कार्यक्रम था, जिसे एक निजी होटल में आयोजित किया गया था. सरकार से कोई अनुमति नहीं मांगी गई थी, सरकार से कोई पैसा नहीं लिया गया था और कोई भी सरकारी अधिकारी मौजूद नहीं था. हालांकि, अगर जांच में कानून का कोई उल्लंघन पाया जाता है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी."
इस मुद्दे पर जम्मू और कश्मीर विधानसभा में तीखी बहस हुई, जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी), पीडीपी और निर्दलीय सदस्यों ने स्थिति से निपटने के सरकार के तरीके की आलोचना की. एनसी विधायक तनवीर सादिक ने स्वीकार किया कि यह आयोजन अनुचित था और उन्होंने त्वरित कार्रवाई के लिए अब्दुल्ला की प्रशंसा की, जबकि मंत्री सकीना इटू ने भी घटना की निंदा करते हुए कहा कि यह रमजान के दौरान नहीं होना चाहिए था.