मुजफ्फरनगर: 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण विकास हुआ है. नंगला मंदौड़ पंचायत में सरकारी काम में बाधा डालने और निषेधाज्ञा उल्लंघन के केस में पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, पूर्व मंत्री सुरेश राणा, यूपी के कौशल विकास राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल, सपा सांसद हरेंद्र मलिक समेत 22 आरोपियों से शासन की संस्तुति पर केस वापस ले लिया गया है.
विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट के पीठासीन अधिकारी डॉ. देवेंद्र सिंह फौजदार ने इस संबंध में आदेश पारित किए हैं. मामला 2013 का है. समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान 27 अगस्त 2013 को कवाल कांड हुआ था, जिसमें भीड़ ने गौरव और सचिन की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. 31 अगस्त को उनकी शोक सभा का आयोजन प्रस्तावित था. प्रशासन ने धारा 144 लगाकर कवाल से पांच किलोमीटर के क्षेत्र में किसी भी जनसभा या शोक सभा पर रोक लगा दी थी. इसके बावजूद भीड़ ने नंगला मंदौड़ में भारतीय इंटर कॉलेज के मैदान पर शोक सभा की थी.
इस पर तत्कालीन सिखेड़ा थानाध्यक्ष ने 22 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें भड़काऊ भाषण आदि देने का आरोप लगाया गया था. बाद में स्पेशल एसआईटी ने जांच के बाद कई लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था. योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के बाद सपा शासनकाल में दर्ज दंगों से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई.
इस मुकदमे समेत कुल 87 मामलों को वापस लेने की अनुमति शासन ने दे दी थी. डीएम के निर्देश पर अभियोजन अधिकारी ने कोर्ट में मुकदमा वापस लेने का प्रार्थना पत्र दिया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया. इसके अलावा, दंगों के दौरान एक युवक की हत्या के मामले में छह आरोपियों को कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए बरी भी कर दिया है.