नई दिल्ली: पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बदल देने वाला एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने शुक्रवार को मक्का में एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इस समझौते के तहत इनमें से किसी एक देश पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा. विशेषज्ञ इसे इस्लामी नाटो बता रहे हैं, जिससे भारत और इजरायल के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर गुरुवार को ही सऊदी अरब पहुंच गए थे. तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तय्यप एर्दोगन भी शुक्रवार को समझौते के लिए मौजूद रहे. डिफेंस एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, इस गठबंधन में सऊदी अरब की दौलत, तुर्की की एडवांस्ड मिलिट्री टेक्नोलॉजी (खासकर ड्रोन) और पाकिस्तान की परमाणु क्षमता का इस्तेमाल होगा. यह पिछले साल के सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौते का ही विस्तार है.
लेकिन भारत ने इस खतरे को पहले ही भांप लिया था. सोढ़ी के मुताबिक, भारत ने इजरायल, यूएई, ग्रीस और साइप्रस के साथ मजबूत रणनीतिक और रक्षा संबंध बनाकर 'बिग-5' का ताकतवर मोर्चा तैयार कर रखा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस साल यूएई और इजरायल के दौरे कर चुके हैं. ग्रीस और साइप्रस से भी सहयोग बढ़ाया गया है.
सोढ़ी कहते हैं, “भारत ने तुर्की के दुश्मन ग्रीस और साइप्रस से समझौते किए, वहीं पाकिस्तान को नापसंद करने वाले यूएई और इजरायल से दोस्ती और मजबूत की है. इस समझौते से एक दिन पहले ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी से फोन पर बात की थी.” भारत के स्ट्रेटेजिक एक्सपर्ट डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने भी इस पैक्ट को भारत के लिए बड़ा खतरा बताया है. उन्होंने 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की द्वारा पाकिस्तान को सैन्य ड्रोन दिए जाने का हवाला दिया है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस घटनाक्रम पर करीब से नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर अपडेट देता रहेगा. सऊदी अरब ने साफ किया है कि यह समझौता किसी मिलिट्री गुट या सांप्रदायिक ब्लॉक को बनाने की कोशिश नहीं है. विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत के सऊदी अरब से अच्छे संबंध होने के कारण सऊदी शायद ही पाकिस्तान या तुर्की का भारत के खिलाफ साथ दे. भारत ने समय रहते रणनीतिक कदम उठाकर पाकिस्तान-तुर्की की नापाक कोशिशों को बेअसर करने की तैयारी कर ली है. अब देखना यह है कि 'इस्लामी नाटो' भारत के इस दमदार 'पंच' के आगे कितना टिक पाता है.