नई दिल्ली: अभिनेत्री सेलिना जेटली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे अपने भाई, मेजर विक्रांत जेटली (पूर्व भारतीय सेना स्पेशल फोर्सेज अधिकारी) की रिहाई के लिए हस्तक्षेप करें, जो सितंबर 2024 से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में हिरासत में हैं. मीडियो को दिए इंटरव्यू में सेलिना जेटली अपने भाई की हिरासत और गिरफ्तारी से जुड़ी जानकारी की कमी के बारे में बताते हुए रो पड़ीं.
यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच चुका है, जहां कोर्ट ने विदेश मंत्रालय (MEA) को निर्देश दिया है कि मेजर जेटली का यूएई में प्रतिनिधित्व करने के लिए एक कानूनी फर्म नियुक्त की जाए. कोर्ट के आदेश के बाद यूएई स्थित कानूनी फर्म खालिद अलमारी पार्टनर्स एंड एडवोकेट्स ने मेजर जेटली को मुफ्त कानूनी सहायता देने का फैसला किया है. रिटायर्ड स्पेशल फोर्सेज कमांडो मेजर विक्रांत जेटली पिछले 16 महीनों से यूएई में हिरासत में हैं.
सेलिना जेटली ने कोर्ट को बताया कि उनके भाई को गैरकानूनी तरीके से उठाया और हिरासत में लिया गया और कई महीनों तक उनकी कानूनी स्थिति, कल्याण या आरोपों के बारे में कोई औपचारिक जानकारी नहीं दी गई. उन्होंने कहा कि जून 2025 में ही उन्हें पता चला कि उन्हें अबू धाबी के अल-वथबा डिटेंशन सेंटर में स्थानांतरित कर दिया गया है. सेलिना जेटली के अनुसार, उनके भाई को मॉल ऑफ द एमिरेट्स के पार्किंग क्षेत्र से अज्ञात व्यक्तियों ने उठाया, जिन्होंने उनकी एमिरेट्स आईडी मांगी और उन्हें काली कार में ले गए.
उन्होंने कहा कि लगभग नौ महीनों तक कोई आधिकारिक गिरफ्तारी रिकॉर्ड नहीं था. उन्होंने कहा कि उन्हें बिना किसी स्पष्टीकरण के ले जाया गया. न गिरफ्तारी का कोई रिकॉर्ड था, न कानूनी सलाहकार से मुलाकात की अनुमति, न कोई संचार. मुझे भी नहीं पता था कि मेरा भाई कहां है. मेजर जेटली अपनी पत्नी द्वारा 2016 में स्थापित कंपनी मटिटी ग्रुप इंटरनेशनल के साथ काम कर रहे थे, जो मानव संसाधन, रिस्क मैनेजमेंट और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम करती है. सेलिना जेटली ने कहा कि उन्हें अब तक केवल एक अभियोजन संख्या और राष्ट्रीय सुरक्षा का अस्पष्ट संदर्भ मिला है, लेकिन आरोपों की कोई स्पष्टता नहीं है.
उन्होंने कहा कि मुझे सिर्फ एक शब्द पता है. राष्ट्रीय सुरक्षा. बस इतना ही. कोई आरोप नहीं, कोई अभियोजन विवरण नहीं. सेलिना जेटली ने बताया कि उन्होंने यूएई में भारतीय मिशन और नई दिल्ली में MEA से बार-बार संपर्क किया, लेकिन नवंबर 2024 में MADAD पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने तक कोई जवाब नहीं मिला. तब भी जवाब टेम्प्लेट वाले थे और कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई.
उन्होंने कहा कि मुझे सिर्फ पोर्टल से सुनाई दे रही थी, लोगों से नहीं. एक बहन के लिए जो अपने भाई की तलाश में है, यह बेहद दुखदायी है. अक्टूबर 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट का रुख करने के बाद कुछ प्रगति हुई. हाई कोर्ट ने भाई-बहन के बीच फोन कॉल की सुविधा देने का भी निर्देश दिया, लेकिन अभी तक यह नहीं हो सका. कोर्ट के नवीनतम आदेश के बाद MEA को कानूनी फर्म नियुक्त करने का निर्देश मिला, जिसके परिणामस्वरूप खालिद अलमारी पार्टनर्स एंड एडवोकेट्स ने कानूनी सहायता के लिए प्रतिनिधित्व करने पर सहमति जताई.
सेलिना जेटली ने कहा कि पहले कई कानूनी फर्मों ने "मिलियन्स दिरहम" मांगे थे, जो वह वहन नहीं कर सकती थीं. उन्होंने कहा कि वे यह हमारे सैनिक के लिए कर रहे हैं. वे सीमाओं से परे न्याय और गरिमा में विश्वास करते हैं. कोर्ट में परिवार के भीतर कानूनी प्रतिनिधित्व को लेकर अलग-अलग राय के मुद्दे पर सेलिना जेटली ने कहा कि 16 महीनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कोई फर्म नियुक्त नहीं हुई थी.
उन्होंने कहा कि हमारे देश का एक सैनिक विदेशी जेल में बिना अभियोजन के है. कानूनी सहायता में और देरी क्यों होनी चाहिए?. इंटरव्यू में सेलिना जेटली ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि मोदीजी से मेरी गुजारिश है कि कृपया इस सैनिक को वापस लाइए. उन्होंने अपना पूरा युवा काल राष्ट्र को समर्पित किया है. अगर उन्होंने कुछ गलत किया होता, तो अब तक अभियोजन हो चुका होता.
कतर में पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारियों की हिरासत से तुलना करते हुए सेलिना जेटली ने कहा कि पैटर्न समान लगता है और उच्च स्तरीय हस्तक्षेप की जरूरत है. उन्होंने कहा कि हमारे सैनिक सिर्फ संख्या नहीं हैं. राष्ट्र को उनके पीछे खड़ा होना चाहिए. इंटरव्यू को भावुक संदेश के साथ समाप्त करते हुए सेलिना जेटली ने अपने भाई से कहा, "दीदी आपके साथ है. पूरा देश आपके साथ है. मैं आपको वापस लाने के लिए पहाड़ हिला दूंगी. जय हिंद."