रायपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि लंबे समय तक चले लिव-इन रिलेशनशिप में शारीरिक संबंध के लिए सहमति मानी जाएगी. ऐसे में यदि पुरुष बाद में शादी करने से इनकार कर दे तो इसे बलात्कार नहीं माना जा सकता.
कोर्ट ने 29 जून को एक महिला की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा.
मामला क्या था?
महिला (40 वर्षीय) ने आरोप लगाया था कि 2019 में एमबीए के दौरान मिले आरोपी ने शादी का वादा करके उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और करीब 2 साल तक साथ रहे. बाद में आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया. महिला ने दिसंबर 2022 में IPC की धारा 376 (बलात्कार) और 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध) के तहत FIR दर्ज कराई थी. निचली अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया था. महिला ने हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया.
कोर्ट की टिप्पणियां
आजकल महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं, इसलिए ऐसे मामलों में पेडेंटिक (रूढ़िवादी) नजरिया नहीं अपनाया जाना चाहिए.
कोर्ट ने कहा कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप है.