नई दिल्ली: सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने के बावजूद जंतर-मंतर पर छात्रों का जोश और उत्साह कम नहीं हुआ है. दिल्ली यूनिवर्सिटी, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी और जामिया मिल्लिया इस्लामिया जैसी प्रमुख यूनिवर्सिटीज की अपील के बावजूद सैकड़ों छात्र प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं. छात्रों का साफ कहना है कि मांगें पूरी होने तक वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे.
जंतर-मंतर पर इन दिनों नई-नई भीड़ जुट रही है. नारे गूंज रहे हैं और युवा नई ऊर्जा के साथ हिस्सा ले रहे हैं. ट्रैफिक व्यवस्था को भी कुशलता से संभाला जा रहा है. छात्रों का मानना है कि यह आंदोलन सिर्फ NEET तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग है.
यूनिवर्सिटीज की अपील को अनसुना
दिल्ली यूनिवर्सिटी के बाद JNU और जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन ने भी छात्रों और शिक्षकों से प्रदर्शन स्थल से दूर रहने की अपील की है. JNU प्रशासन ने X पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए अलर्ट जारी किया, लेकिन छात्रों ने इसे अनसुना कर दिया. वे कहते हैं कि ये अपीलें GenZ के दबाव को ही दिखाती हैं.
डीयू के मैथ्स ऑनर्स छात्र राज ने कहा, ''मैं यहां इसलिए आया हूं क्योंकि आंदोलन को अपनी आंखों से देखना चाहता था. सोशल मीडिया पर दोनों पक्ष देखे, लेकिन यहां आकर पता चला कि मांगें जायज हैं. प्रधानमंत्री ने अब जो कहा, वो पहले क्यों नहीं कहा? यह सिर्फ NEET नहीं, पूरी शिक्षा प्रणाली का मुद्दा है.''
डीयू के सोशियोलॉजी ऑनर्स छात्र अर्णव ने पूछा, ''NEP लागू करने में इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षकों की कमी और पढ़ाई का बोझ जैसी समस्याओं पर शिक्षा मंत्रालय क्यों चुप है?'' JNU के पीजी छात्र दीपक कुमार ने कहा, ''JNU हमेशा से लोकतांत्रिक प्रदर्शनों और स्वस्थ बहस के लिए जाना जाता था, लेकिन अब प्रशासन हर प्रदर्शन से रोकने की कोशिश कर रहा है.''