नई दिल्ली: लाल किले के ठीक सामने व्यस्त सड़क पर हुआ भयानक धमाका सिर्फ़ राजधानी में ही नहीं, पूरे देश में गूंज उठा. धमाके के बाद हर कोई अपने मोबाइल या टीवी स्क्रीन से चिपका हुआ था, यह जानने के लिए बेताब कि उस सफ़ेद ह्यूंडई i20 को चला रहा शख्स आखिर कौन था जो विस्फोट में उड़ गया. फिर विभिन्न न्यूज़ चैनलों पर डॉ. उमर उन नबी की तस्वीर आने लगी.
यही वह शख्स माना जा रहा है जो स्टीयरिंग पर था और जिसका शरीर भी धमाके में टुकड़े-टुकड़े हो गया. जांच एजेंसियों ने कश्मीर में नबी के परिवार के सदस्यों को हिरासत में ले लिया है और डीएनए सैंपल भी ले लिए हैं. इन्हें घटनास्थल पर मिले डीएनए से मिलान करके ड्राइवर की पहचान की पुष्टि की जाएगी. फैशनेबल बज-कट हेयर, साफ़-सुथरी दाढ़ी और पारदर्शी फ्रेम का चश्मा – डॉ. उमर नबी की इस तस्वीर को देखकर बहुत से लोग विश्वास नहीं कर पा रहे थे कि एक डॉक्टर, जिसका काम जान बचाना था – उसने नई दिल्ली को घायल कर दिया और कम से कम 10 लोगों की जान ले ली. लेकिन कश्मीर में एक रिटायर्ड मेडिकल प्रोफेसर, जो यह खबर देख रहे थे, उन्हें ज़्यादा हैरानी नहीं हुई – हालांकि दुख ज़रूर हुआ.
उन्हें नबी में पहले से ही कुछ ऐसा नज़र आ गया था जो अब पूरी दुनिया देख रही है. प्रोफेसर डॉ. गुलाम जीलानी रूमशू उन चार लोगों में शामिल थे जिन्होंने अनंतनाग के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से नबी की नौकरी खत्म करने की सिफारिश की थी. कारण था – एक मरीज की मौत. यह घटना 2023 की है. उस वक्त नबी, श्रीनगर से एमबीबीएस और एमडी करने के बाद गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट (SR) के तौर पर काम कर रहे थे.
तीन साल की रेजीडेंसी के लिए वे अनंतनाग आए थे, जहां जनरल मेडिसिन विभाग में डॉ. जीलानी उनके सीनियर थे. लेकिन नबी गलत चयन साबित हुए. शुरू से ही उनके खिलाफ शिकायतें आने लगीं. साथी डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और मरीज भी – सब यही कहते थे कि डॉ. उमर नबी न सिर्फ़ रूखे और लापरवाही भरे थे बल्कि अक्सर अस्पताल से गायब भी रहते थे.
यह बात डॉ. नबी की भाभी मुज़मिला के उस बयान से बिल्कुल उलट है जो उन्होंने 10 नवंबर के दिल्ली ब्लास्ट के बाद मीडिया को दिया था. मुज़मिला के मुताबिक उमर हमेशा अंतर्मुखी थे, ज्यादातर अपने कमरे में बंद रहकर पढ़ाई करते थे. लेकिन डॉ. जीलानी ने मीडिया को बताया कि नबी की लापरवाही की वजह से सरकारी अस्पताल में एक मरीज की जान चली गई.
वह मरीज क्रिटिकल हालत में था और नबी के जिम्मे था. लेकिन एक दिन डॉक्टर मरीज को देखने की बजाय ड्यूटी से गायब हो गए. इसी बीच मरीज की हालत और बिगड़ गई. वहां मौजूद एक जूनियर डॉक्टर ने उसे बचाने की बहुत कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हुआ. मरीज की मौत हो गई.मरीज के परिवार ने अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के पास नबी के खिलाफ शिकायत दर्ज की. इसके बाद चार सीनियर डॉक्टरों की एक कमेटी बनाई गई, जिसमें डॉ. जीलानी भी शामिल थे. इस कमेटी में अनंतनाग गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के तीन अन्य सीनियर डॉक्टर भी थे.
डॉ. मुहम्मद इकबाल (कॉलेज के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट), डॉ. मुमताज़ उद दीन वानी (जनरल सर्जरी के प्रोफेसर) और डॉ. संजीत सिंह रिसाम (डेंटिस्ट्री विभाग के अध्यक्ष). मीडिया टीम ने इन तीनों से भी संपर्क किया, लेकिन सभी ने इस मामले पर और कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया. डॉ. जीलानी के अनुसार, नबी ने साफ़ इनकार कर दिया कि वे उस दिन ड्यूटी से गायब थे. लेकिन जब अस्पताल ने उस दिन का सीसीटीवी फुटेज चेक किया तो उनकी झूठ तुरंत पकड़ में आ गई.
सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि जांच के दौरान कई बार बुलाने के बावजूद नबी कमेटी के सामने पेश ही नहीं हुए. आखिरकार कमेटी ने उनकी छंटनी की सिफारिश की और उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनंतनाग के अस्पताल से निकाले जाने के बाद 2023 में ही डॉ. उमर उन नबी फरीदाबाद के अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंस में जुड़ गए थे. एक केयरगिवर से आतंकी हमले का सहयोगी बनने तक का यह सफर क्या रहा – इसका पता आगे की जांच से ही चलेगा.