बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बावजूद तेजस्वी यादव बने नेता प्रतिपक्ष

Amanat Ansari 17 Nov 2025 06:44: PM 1 Mins
बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बावजूद तेजस्वी यादव बने नेता प्रतिपक्ष

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी शिकस्त के बावजूद आरजेडी के तेजस्वी यादव को सोमवार को सर्वसम्मति से नेता प्रतिपक्ष चुन लिया गया. 243 सीटों वाली विधानसभा में एनडीए ने 202 सीटें जीतीं, जबकि महागठबंधन सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया. अकेले राजद के पास 25 सीटें आईं, जो न्यूनतम 10% (यानी 24.3, गोलांक 25) का आंकड़ा पूरा करती हैं. इसी वजह से तेजस्वी को आधिकारिक रूप से विपक्ष के नेता की मान्यता मिल गई.

नेता प्रतिपक्ष की भूमिका क्यों अहम है?

  • सरकार की हर नीति और फैसले पर सवाल उठाने का सबसे बड़ा हक इसी पद को होता है.
  • CBI डायरेक्टर, CVC चीफ, NHRC चेयरमैन, लोकपाल, मुख्य सूचना आयुक्त जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं की नियुक्ति समिति में विपक्ष के नेता का सदस्य होना अनिवार्य है.
  • सदन में सरकार के बाद सबसे प्रमुख कुर्सी और प्रोटोकॉल इसी पद को मिलता है.
  • अगर कोई पार्टी 10% सीटें नहीं जीतती तो विधानसभा बिना मान्यता प्राप्त नेता प्रतिपक्ष के ही चलती रहती है.

इन दिनों लालू परिवार में चल रहे घमासान के बीच यह फैसला आया है. रोहिणी आचार्य के घर छोड़ने और गंभीर आरोप लगाने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता और लालू के पुराने साथी शिवानंद तिवारी ने खुलकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, ''लालू-राबड़ी अपनी बेटी के रोते हुए घर छोड़ने पर चुप क्यों हैं? बेटी कह रही है कि उस पर चप्पल फेंकी गई, फिर भी परिवार मौन है.''

इस चुनाव ने एक नया इतिहास भी रचा. भाजपा की अलीनगर सीट से जीतीं मशहूर लोकगायिका मैथिली ठाकुर सिर्फ 25 साल की उम्र में बिहार विधानसभा पहुंचीं और सबसे कम उम्र की विधायक बन गईं.

तेजस्वी के नेता प्रतिपक्ष बनने से बिहार की राजनीति में एक बार फिर यादव परिवार का दबदबा कायम रहा, भले ही सीटें कम हों, लेकिन विपक्ष की कमान अब भी उनके हाथ में है.

Bihar Assembly elections Tejashwi Yadav Bihar Leader of Opposition