Digvijaya Singh Raises Questions Over High Court Verdict on Bhojshala: भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के हालिया फैसले के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस फैसले पर कई सवाल उठाए हैं. उन्होंने दावा किया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट में परिसर में मंदिर होने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले थे.
ग्वालियर में मीडिया से बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि कोर्ट का आदेश पूरी तरह साफ नहीं है, इसलिए वे पूरा फैसला पढ़ रहे हैं. उन्होंने जोर दिया कि अभी कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. ASI रिपोर्ट का हवाला देते हुए कि दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ मंदिर-मस्जिद का नहीं, बल्कि संरक्षित स्मारक के नियमों और कानूनी प्रावधानों से भी जुड़ा है. उन्होंने उमा भारती सरकार के समय पेश की गई ASI रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि उसमें भोजशाला को मंदिर बताने वाले कोई प्रमाण नहीं थे.
उन्होंने मांग की कि संरक्षित स्मारकों में पूजा-अर्चना की कानूनी स्थिति को साफ किया जाए और इस पूरे मामले का अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना चाहिए. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञानवापी, संभल और कृष्ण जन्मभूमि जैसे कई धार्मिक विवाद पहले से ही अदालतों में चल रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार और कुछ संगठन इन मुद्दों को जानबूझकर उछालकर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं.
दिग्विजय सिंह का कहना था कि जब देश आर्थिक, बेरोजगारी और सामाजिक समस्याओं से जूझ रहा है, तो हिंदू-मुस्लिम विवादों को बढ़ावा देना सही नहीं है. दिग्विजय सिंह के बयान पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने तेज प्रतिक्रिया दी. VHP नेता विनोद बंसल ने कहा कि कांग्रेस का रवैया हमेशा हिंदू विरोधी रहा है और अब इसका असली चेहरा सामने आ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस धार्मिक मुद्दों पर दोहरी नीति अपनाती है और हिंदू भावनाओं को कभी सम्मान नहीं देती.