पटना : दिनेश लाल यादव उर्फ ‘निरहुआ’ का महंगाई और चीनी की बढ़ती कीमतों पर दिया गया बयान इस समय चर्चा में है. 24 अगस्त 2026 को पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों ने उनसे चीनी के बढ़ते दाम और महंगाई को लेकर सवाल किया. जवाब में उन्होंने कहा कि संसाधन सीमित हैं और जनसंख्या बढ़ रही है, इसलिए महंगाई बढ़ रही है. उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण को महंगाई पर काबू पाने से जोड़ते हुए कहा कि जनसंख्या पर कंट्रोल करो, महंगाई पर कंट्रोल हो जाएगी.
हालांकि, चीनी की मौजूदा कीमतों को सिर्फ बढ़ती आबादी से जोड़ना पूरी तस्वीर नहीं बताता. अगस्त 2026 में भारत में चीनी की कीमतें करीब दो महीनों में लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी बड़ी वजह घरेलू चीनी उत्पादन में कमी और बाजार में सीमित आपूर्ति है. सरकार ने कीमतों पर दबाव कम करने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति भी दी है.
सरकार के अनुसार भी मौजूदा तेजी के पीछे कई कारण हैं. कम उत्पादन, मौसम से फसल को नुकसान, त्योहारों से बढ़ती मांग, वैश्विक आपूर्ति में कमी, बाजार में जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसे कारक. आंकड़ों पर नजर डालें तो जुलाई 2026 में भारत की खुदरा महंगाई 4.45 प्रतिशत और खाद्य महंगाई 5.52 प्रतिशत रही. यानी महंगाई का दबाव जरूर बढ़ा है, लेकिन इसके पीछे केवल जनसंख्या वृद्धि को कारण मानना आर्थिक तस्वीर को काफी सरल बना देता है.
निरहुआ का बयान राजनीतिक तौर पर चर्चा में जरूर है, लेकिन चीनी की मौजूदा महंगाई के तत्काल कारणों में उत्पादन, आपूर्ति, मौसम और मांग की भूमिका ज्यादा सीधे तौर पर दिखाई देती है.