DM ने मारा बड़े ऑफिसर के ऑफिस में छापा, मिला ऐसा लेटर जौनपुर से लखनऊ मची हलचल!

Global Bharat 23 Aug 2024 05:17: PM 2 Mins
DM ने मारा बड़े ऑफिसर के ऑफिस में छापा, मिला ऐसा लेटर जौनपुर से लखनऊ मची हलचल!

लेखक- अभिषेक चतुर्वेदी

ये तस्वीरें जौनपुर की हैं, ब्लू कलर की शर्ट पहने ये साहब जौनपुर जिले के डीएम रविन्द्र कुमार हैं, जिन्हें ये ख़बर मिली कि साहब सरकारी ऑफिस के एक कमरे में बड़ी धांधली चल रही है, शिकायत मिलते ही टीम लेकर पहुंचते हैं, तो वहां एक लेटर पड़ा मिलता है, इनके हाथ में जो लेटर दिख रहा है, ऐसी ही कई लेटर उन्हें इस कमरे में दिखते हैं, जिसमें लाखों-करोड़ों की बात लिखी होती है. यहां तक कि फर्जी मुहर और फर्जी कागजात भी दिखते हैं. जिसे देखते ही डीएम रविन्द्र कुमार पहले भड़कते हैं, उसके बाद दो लोगों की बर्खास्तगी का आदेश जारी करते हैं, एक शिक्षक से स्पष्टीकरण मांगते हैं और एक क्लर्क को कलेक्ट्रेट से अटैच कर देते हैं. अब इनका गुनाह क्या था, जो इतना बड़ा एक्शन हुआ, वो भी जान लीजिए.

डीएम साहब बताते हैं...NHAI ऑफिस में भ्रष्टाचार की शिकायत हमें मिली थी. NHAI के प्रभारी CRO के साथ हमने औचक निरीक्षण किया, 3 घंटे तक फाइलें खंगाली तो कुछ संदिग्ध फाइलें मिली. ऐसी फर्जी फाइलें क्यों बनाई गई, ये जांच का विषय है. इस पूरे खेल में एक कानूनगो और तीन कर्मचारी शामिल हैं. जिस कंप्यूटर ऑपरेटर ने शिकायत दी है उसकी भूमिका भी जांच के घेरे में है.

डीएम साहब का मानना है कि आपसी मनमुटाव के चक्कर में इनकी पोल खुल गई. यानि आपस में इनकी लड़ाई नहीं होती तो शायद कलेक्टर साहब तक ये बात ही नहीं पहुंच पाती कि यहां क्या चल रहा है. फिलहाल ऑफिस को सीज कर दिया गया है, और ये पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ये खेल कबसे चल रहा है, और इसमें कौन-कौन शामिल है. IAS रविन्द्र कुमार को जानने वाले लोग कहते हैं कि ये जितने नेकदिल हैं, उतने ही ईमानदार भी हैं. अगर इनके पास कोई फाइल पहुंच जाती है तो फिर वो फाइल तभी बंद होती है जब असली आरोपी पकड़ा जाए. 

कौन हैं रविन्द्र कुमार मांदड़

  • राजस्थान के रहने वाले रविन्द्र कुमार साल 2013 बैच के IAS ऑफिसर हैं
  • रामपुर में DM रहे, मिशन समर्थ से 900 दिव्यांग बच्चों की सर्जरी करवाई
  • अब तक 900 से ज्यादा तालाबों का भी निर्माण करवा चुके हैं

बीते दिनों चुनाव के दौरान जब ईवीएम से भरी ट्रक को लेकर सपा कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया था, तो रविन्द्र कुमार ने ऐसी सच्चाई बताई थी कि हंगामा करने वालों ने तुरंत कदम पीछे खींच लिए थे, इन्होंने साफ-साफ कहा था कि आप लोगों के आरोप बेबुनियाद हैं, सच्चाई को स्वीकार करना होगा. इनके करीबी बताते हैं कि रविन्द्र कुमार का मन बचपन से क्रिकेटर बनने का था, और उसके लिए जीतोड़ मेहनत भी करते थे, लेकिन जब मां ने कहा कि क्रिकेट छोड़ो, पढ़ाई करो, बड़े ऑफिसर बन जाओगे तो क्रिकेट भी खेल लोगे, तो इन्होंने ऐसी मेहनत की कि UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास करके ही दम लिया. अलग-अलग जिलों में पोस्टिंग के दौरान इनके सामने अलग-अलग चुनौतियां भी रहीं, लेकिन हर बार रविन्द्र कुमार ने खुद को साबित किया और अब इस केस में भी उन्हें खुद को साबित करना होगा. अगर घोटाला हुआ तो उसका न सिर्फ पर्दाफाश करना होगा, बल्कि ये भी पता करना होगा कि वो लोग कौन हैं, जो मोदी-योगी के न खाऊंगा,न  खाने दूंगा के नारे में पलीता लगा रहे हैं.

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