मोईद खान को क्या जेल से दोबारा गिरफ्तार किया जाएगा, जैसे नेताओं और माफिया को जेल के अंदर ही दूसरी एजेंसी गिरफ्तार कर लेती है, क्या मोईद खान के साथ भी वही होने वाला है, ईडी ऑफिस में मोईद खान के नाम की चर्चा क्यों होने लगी है, यूपी पुलिस के बड़े-बड़े अधिकारी ये पता करने लगे कि सिर्फ दूसरी क्लास पास मोईद खान 50 करोड़ की संपत्ति का मालिक कैसे बना. किस-किस ने उसकी मदद की, किसने कितना पैसा दिया, ये सब एक डायरी में दर्ज है, जो पुलिस के हाथ लगते ही मोईद की मुसीबतें बढ़ा देगा, पर अब तक जो थ्योरी सामने आई है उसके मुताबिक मोईन ने बेकरी सिर्फ 6 साल पहले खोली थी और बेकरी सिर्फ दिखावे के लिए था, असल धंधा इसका कुछ और था.
मोईद ने मदरसे तक शुरुआती पढ़ाई की है, सिर्फ नाम लिखना जानता है, कोई बड़ा नोटिस आ जाए तो उसे समझ नहीं पाता. सिर्फ दूसरी क्लास तक पढ़ाई करने वाले मोईद ने 18 साल की उम्र में स्थानीय नेताओं ने मेलजोल बढ़ाना शुरू कर दिया, और साथ में जमीनों की खरीद-बिक्री करने लगा, उससे थोड़े पैसे मिले तो इसका लालच बढ़ता गया और बड़े लोगों से परिचय का गलत फायदा उठाकर पहले इसने सरकारी जमीनों पर कब्जा जमाना शुरू किया, उसके बाद एक मॉल पर कब्जा किया, जिसमें अभी बैंक चलता है. वहां भी अब बुलडोजर एक्शन होने की चर्चा तेज हो चली है.
जब रसूख बढ़ गया तो इसने दो समुदायों को भड़काने का काम भी शुरू किया और इस आरोप में जेल भी जा चुका है. स्थानीय दलित महिलाएं कहती हैं कि इसने हमारी जमीनों पर भी कब्जा किया है. दर्जनों महिलाएं इसके खिलाफ शिकायत लेकर थाने पहुंची हैं और दोबारा गिरफ्तारी की मांग कर रही हैं, जो ये बताता है कि ये एक नंबर का माफिया है, जो अतीक और मुख्तार की तरह बड़ा भले ही नहीं बना, पर इसके कारनामे वैसे ही थे और इसका जो सबसे बड़ा मददगार है, राशिद, उसके मुख्तार के भाई अफजाल अंसारी से अच्छे संबंध हैं.
मतलब मोईन ने जो काली कमाई की है, वो एक अकेले की नहीं है. अब यही पता करने की कोशिश की जा रही है कि इसने जो 50 करोड़ की संपत्ति बनाई है, उसमें से कितनी वैध है, और कितनी अवैध. चूंकि इसका एक रिश्तेदार लंदन में भी रहता है, ऐसी मीडिया रिपोर्ट सामने आई है, तो उन पैसों की हेराफेरी करके अगर इसने कुछ किया होगा, या टैक्स चोरी की होगी, घोटाला किया होगा तो फिर ईडी और सीबीआई की एंट्री भी मोईन के केस में हो सकती है और उसके बाद तो ऐसे-ऐसे राज खुलेंगे कि यूपी पुलिस के बड़े-बड़े अधिकारी भी शायद दंग रह जाएं, क्योंकि जिन बातों का पता पुलिस काफी मुश्किलों के बाद भी नहीं लगा पाती, उसे बड़ी आसानी से सीबीआई और ईडी वाले ढूंढ निकालते हैं.
इस केस में तो मोईद की मदद करने का आरोप कई लोगों पर है, तो फिर कई नेताजी लपेटे में आ सकते हैं. मीडिया रिपोर्ट तो ये तक बताती है कि शुरुआती दिनों में मोईद खान के स्थानीय कांग्रेस नेताओं से उसके इतने तगड़े संबंध थे कि वो कांग्रेस कार्यालय में भी बैठता था. वहां के लोग शुरुआती दिनों में उसे कांग्रेस नेता समझते थे. लेकिन बाद में जब इसने सपा ज्वाइन की और साल 2012 में भदरसा का नगर अध्यक्ष बना तब सपा नेता के रूप में फेमस हो गया. अयोध्या ही नहीं लखनऊ तक इसकी पकड़ मजबूत हो गई और आज उसकी यही पकड़, उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गई है क्योंकि जिन साथियों पर उसे भरोसा था कि बचा लेंगे, अब वही लोग जांच के दायरे में आ गए हैं.
जिन लोगों के साथ इसने गलत किया है, वो सब एक-एक कर इंसाफ मांगने के लिए थाने और अदालत की चौखट तक पहुंच रहे हैं, जहां मोईन खान के हर गुनाह का हिसाब होना है. पर सिर्फ 15 सालों में कोई 50 करोड़ की संपत्ति बना ले, ये बात चौंकाने वाली लगती है, वो भी तब जब उसने बेकरी सिर्फ 6 साल पहले खोली हो. आपको क्या लगता है मोईन ने कोई और बड़ा खेल किया है, जो मीडिया में सामने नहीं आया, कमेंट कर बता सकते हैं.