End of Life on Earth: वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च ने भविष्य को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है. इस अध्ययन के मुताबिक, पृथ्वी पर जटिल जीवन का अंत लगभग 100 करोड़ साल बाद हो सकता है. पहले वैज्ञानिक 200 करोड़ साल का समय मानते थे, लेकिन नई गणना में यह अवधि आधी हो गई है. सबसे अहम बात यह है कि इस विनाश के लिए इंसान जिम्मेदार नहीं होंगे, बल्कि हमारा अपना सूरज इसका मुख्य कारण बनेगा.
सूरज की बढ़ती चमक और गर्मी
समय के साथ सूरज लगातार अधिक चमकदार और गर्म होता जा रहा है. इस बढ़ती ऊर्जा का सीधा प्रभाव पृथ्वी के वातावरण पर पड़ेगा. समुद्रों का पानी तेजी से भाप बनकर वायुमंडल में चला जाएगा. नतीजतन, पौधों और सूक्ष्म जीवों (जो आज ऑक्सीजन पैदा करते हैं) की गतिविधियां रुक जाएंगी.
वर्तमान में वायु में करीब 21% ऑक्सीजन है, जो जीवन को संभव बनाए हुए है. लेकिन उस समय ऑक्सीजन का स्तर 1% से भी नीचे चला जाएगा. इससे मनुष्य, जानवर और अन्य जटिल प्राणी जीवित नहीं रह सकेंगे. केवल कुछ सरल, प्राचीन प्रकार के सूक्ष्म जीव ही बच पाएंगे.
पृथ्वी वापस पुराने रूप में
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि पृथ्वी उस स्थिति में लौट आएगी जो अरबों साल पहले थी, जब वातावरण में ऑक्सीजन न के बराबर था और केवल बहुत सरल जीव मौजूद थे. यह घटना अभी बहुत दूर की है, इसलिए अभी घबराने की कोई जरूरत नहीं. वैज्ञानिकों का मानना है कि तब तक की पीढ़ियां इतनी उन्नत हो चुकी होंगी कि वे या तो नई तकनीकों से समस्या का समाधान ढूंढ लेंगी या दूसरे उपयुक्त ग्रहों पर बसने के विकल्प तैयार कर लेंगी.
इस रिसर्च का कितना महत्व है?
यह अध्ययन सिर्फ पृथ्वी के भविष्य तक सीमित नहीं है. इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि दूसरे सौर मंडलों के ग्रहों पर जीवन की संभावना किन परिस्थितियों में हो सकती है. खासकर उन एक्सोप्लैनेट्स की जांच में यह उपयोगी साबित होगा जहां जीवन की तलाश चल रही है. संक्षेप में, यह रिसर्च हमें याद दिलाती है कि ब्रह्मांड में जीवन कितना नाजुक है और सूरज जैसे स्थिर दिखने वाले तारे भी लंबे समय में बदलते रहते हैं.