नीट पेपर लीक के वो 5 माफिया, जिन्होंने करीब 25 लाख स्टूडेंट की जिंदगी खराब कर दी!

Global Bharat 20 Jun 2024 08:08: PM 3 Mins
नीट पेपर लीक के वो 5 माफिया, जिन्होंने करीब 25 लाख स्टूडेंट की जिंदगी खराब कर दी!

NEET Exam 2024 का मामला इन दिनों गर्माया हुआ है. पक्ष विपक्ष एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन फिलहाल कोई रास्ता निकलते नहीं दिख रहा है. बिहार पुलिस लगातार जांच कर रही है. वहीं सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई है और एनटीए जिसने एग्जाम कंडक्ट कराया है उसे नोटिस भी जारी किया गया है. इसी बीच हम आपको नीट पेपर लीक के वो 5 माफियाओं का नाम बताते हैं, जिन्होंने करीब 25 लाख स्टूडेंट की जिंदगी खराब कर दी है.

माफिया नंबर 1- अमित कुमार

बिहार के मुंगेर जिले का रहने वाला 29 साल का अमित आनंद, इस लोकतांत्रिक देश में लीकतंत्र का राज चलाने वाला बड़ा माफिया है. जो लालू खटाल के बगल में टू बीएचके फ्लैट में रहता है. वहीं पर सारी डील करता है. वहां जब बिहार पुलिस ने छापा मारा तो नीट ही नहीं कई परीक्षाओं के क्वेश्चन पेपर मिले.

जब हवालात में पूछताछ हुई तो बोला ये पहली बार थोड़ी है, मैंने तो इससे पहले भी कई पेपर लीक करवाए हैं, लेकिन पकड़ा नहीं जाता था. उन्होंने बताया कि 30-32 लाख में हमलोग डील करते थे. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अमित आनंद के तार बिहार में कितने ऊपर तक जुड़े होंगे.

माफिया नंबर 2- नीतिश कुमार

पटना के गोपालपुर का रहने वाला 32 साल का नीतीश कुमार, लीकतंत्र का दूसरा बड़ा माफिया है. जिसने पुलिस के सामने ये कबूल किया कि बीपीएससी का भी पेपर लीक मैंने ही करवाया था. बिहार की आर्थिक अपराध शाखा ने ही उस वक्त गिरफ्तार किया था.

माफिया नंबर 3- सिकंदर यादव

समस्तीपुर का रहने वाला 56 साल का सिकंदर यादव, इस फील्ड का नया खिलाड़ी है. उसे किसी से कोई खास मतलब नहीं था, बल्कि इसने नीतीश और अमित को करोड़ों रुपये दिए थे. इसने कहा था कि मेरे 4-5 लड़के हैं, उन्हें नीट की परीक्षा पास करवा दो. पैसे मिल जाएंगे. पुलिस ने जब इसे तोड़ा तो इसने जो बताया वो हिला देने वाला था. इसने कहा हम NHAI के गेस्ट हाउस में रुके थे. जब जांच हुई तो पुलिस को पता चला कि तेजस्वी यादव के PS ने फोन करके ये कमरा बुक करवाया था, क्योंकि वहां आम आदमी की बुकिंग आसानी से नहीं होती.

माफिया नंबर 4- बड़ा अधिकारी या बड़े नेता का करीबी

फिलहाल तेजस्वी यादव के पीएस का नाम सामने आया है, लेकिन उसके अलावा किसी बड़े अधिकारी या नेता के करीबी का भी नाम आगे जांच में सामने आ सकता है., क्योंकि जो गुनाह हुआ है वो छोटा-मोटा नहीं है, बल्कि बड़े लोगों की संलिपत्ता के बगैर ये नहीं हो सकता.

माफिया नंबर 5- साजिश में शामिल स्टूडेंट

स्टूडेंड आम तौर पर माफिया नहीं होते, लेकिन जो इस तरह की हरकतों में शामिल है, वो आगे जाकर क्या बनेगा आप खुद अंदाजा लगा लीजिए. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी कहती है कि धोखाधड़ी से बना डॉक्टर खतरनाक है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस पर रोक लगाने को तैयार नहीं हैं. इस केस में परीक्षा पास होने के लिए छात्र भी साजिश में शामिल रहे हैं, जिसमें एक ऐसा ही छात्र अनुराग यादव पकड़ा गया है, जिसने बताया कि 5 मई को पेपर से एक दिन पहले यानी 4 जून को ही छात्रों को पेपर मिल गया था, जिन्होंने 30-32 लाख दिए थे.

उन्हें क्वेश्चन-आंसर रटवाए गए और बाद में हमने सही-सही जवाब परीक्षा में लिख दिया. पूरी कहानी सुनने के बाद ऐसा लगता है कि नीट की परीक्षा उन लोगों ने भी पास कर ली, जिनके मां-बाप के साथ लाखों-करोड़ों रुपये थे, जबकि परीक्षा सिर्फ उन्हें ही पास होना चाहिए, जिन्होंने मेहनत की हो, जमकर पढ़ाई की हो. क्योंकि ये परीक्षा कोई क्लर्क वाली नहीं है कि अगर जोड़-घटाव या फाइल लिखना नहीं सीखा, तो नहीं सीख पाएंगे, बल्कि ये परीक्षा इंसान की जिंदगी से जुड़ी है.

अगर एक डॉक्टर गलत ऑपरेशन कर देता है, गलत दवाई दे देता है, तो उससे लोगों को न सिर्फ रिएक्शन हो सकता है, बल्कि जान भी जा सकती है. इसलिए नीट की परीक्षा के लिए कम से कम सरकार को बेहतर इंतजाम करना चाहिए, ताकि फ्रॉड करके कोई पास न हो, गलत करके आगे न बढ़े. जिसके अंदर ज्ञान हो वो पास, और जिसे ज्ञान न हो वो फेल हो.

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