नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में दिल्ली से पटना जा रही तेजस राजधानी एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12310) में बम और आग लगने की फर्जी सूचना मिलने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. 17 जनवरी की रात को जीआरपी आगरा कंट्रोल रूम को फोन पर यह सूचना दी गई थी कि ट्रेन के एक कोच में आग लगी है और बम रखा हुआ है. इस खबर से रेलवे और सुरक्षा बलों में हड़कंप मच गया.
ट्रेन को अलीगढ़ स्टेशन पर रोककर आरपीएफ, जीआरपी, बम निरोधक दस्ते (बीडीएस) और डॉग स्क्वॉड की टीमों ने पूरी ट्रेन की गहन तलाशी ली. जांच में कोई संदिग्ध चीज या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली, जिसके बाद ट्रेन को पटना के लिए रवाना कर दिया गया. पुलिस ने इस झूठी सूचना के स्रोत की जांच शुरू की. तकनीकी तरीके से मोबाइल नंबर ट्रैक करने पर पता चला कि कॉल दिल्ली पुलिस के एक हेड कांस्टेबल ने की थी.
आरोपी की पहचान रिंकू तेवतिया के रूप में हुई, जो वर्तमान में नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के दयालपुर थाने में तैनात है. वह मूल रूप से बुलंदशहर जिले के गुलावटी थाना क्षेत्र के विलायतपुर गांव का रहने वाला है और दिल्ली के नरेला पुलिस लाइन कॉलोनी में रहता था. अलीगढ़ की आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीम ने आरोपी को दिल्ली के नरेला इलाके से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में उसने कबूल किया कि उसके गांव में एक व्यक्ति से पुरानी दुश्मनी चल रही थी. उसी रंजिश के कारण उसने जानबूझकर फर्जी सूचना दी ताकि उस व्यक्ति और उसके परिवार को फंसाया जा सके.
अलीगढ़ आरपीएफ के सहायक सुरक्षा आयुक्त गुलजार सिंह और जीआरपी के प्रभारी निरीक्षक संदीप तोमर ने संयुक्त बयान में पुष्टि की कि सूचना पूरी तरह झूठी थी. आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है और कानूनी प्रक्रिया जारी है. यह घटना रेल यात्रियों की सुरक्षा और फर्जी सूचनाओं के गंभीर परिणामों को दर्शाती है, खासकर जब इसमें एक पुलिसकर्मी ही शामिल हो.