नई दिल्ली: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है. न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने उनकी उस याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी समन की कथित अवहेलना के मामले में MP-MLA विशेष अदालत में चल रही कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी.
यह पूरा विवाद रांची के बड़गाईं अंचल से जुड़े कथित भूमि घोटाले की जांच से संबंधित है. ED ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री को जांच के लिए कई बार समन भेजे गए, लेकिन उन्होंने ज्यादातर पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने से परहेज किया. एजेंसी के अनुसार, कुल 10 समन जारी किए गए थे...
पहला समन: 14 अगस्त 2023
उसके बाद: 19 अगस्त, 1 सितंबर, 17 सितंबर, 26 सितंबर, 11 दिसंबर, 29 दिसंबर 2023
फिर 2024 में: 13 जनवरी, 22 जनवरी और 27 जनवरी
इनमें से महज दो समनों पर ही हेमंत सोरेन खुद उपस्थित हुए थे. ED ने इसे PMLA की धारा 63 और IPC की धारा 174 के उल्लंघन के रूप में देखा. इस आधार पर फरवरी 2024 में ED ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) अदालत में शिकायत दर्ज की. CJM ने 4 मार्च 2024 को संज्ञान लिया और मामला MP-MLA विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया. हेमंत सोरेन ने इस संज्ञान को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया.
उनकी दलील थी कि जिन समनों पर वे नहीं जा सके, उनके लिखित जवाब ED को भेज दिए गए थे. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसी ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से बार-बार समन जारी किए, जबकि पुराने समन लैप्स हो जाने के बाद नए पर उन्होंने सहयोग किया.
लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका ठुकरा दी और कहा कि इस स्तर पर कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता. हालांकि, कुछ रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने उन्हें अदालत में व्यक्तिगत पेशी से छूट देने का प्रावधान किया है. अब यह मामला MP-MLA विशेष अदालत में ही आगे बढ़ेगा, जहां मुकदमे की सुनवाई जारी रहेगी. यह फैसला मुख्यमंत्री के लिए कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है.