नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन की अनुमति न देने पर दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सवाल उठाया कि सिर्फ आशंका के आधार पर पूर्ण प्रतिबंध (ब्लैंकेट बैन) कैसे लगाया जा सकता है.
क्षत्रिय करणी सेना की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की गई. सेना के अधिवक्ता रोशन धनाई ने अदालत को बताया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन किया गया था. एसीपी ने पहले अनुमति देने का आश्वासन दिया, लेकिन 15 तारीख को पत्र भेजकर मना कर दिया. पुलिस का तर्क था कि दावा से ज्यादा लोग आ सकते हैं और उन्हें नियंत्रित करना मुश्किल होगा.
कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने पुलिस से पूछा, “आपने खारिज कर दिया? क्यों? क्या इस तरह का आदेश दिया जा सकता है? बस इसलिए कि आपको आशंका है कि कुछ लोग आ सकते हैं? आप ऐसा आदेश कैसे दे सकते हैं?” उन्होंने याद दिलाया कि पिछली सुनवाई में भी साफ कहा गया था कि शर्तें और बंदिशें लगाकर कुछ घंटों के लिए अनुमति दी जा सकती है. “आप मना कैसे कर सकते हैं?” जस्टिस ने सवाल किया.
पुलिस का पक्ष
दिल्ली पुलिस की ओर से एएसजी चेतन शर्मा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के मुताबिक काम कर रहे हैं. जंतर-मंतर संवेदनशील इलाका है और जगह की कमी है. सोशल मीडिया पर लाइक्स को देखते हुए भीड़ क्षमता से ज्यादा हो सकती है. इस पर अधिवक्ता धनाई ने कहा कि दर्शक पूरी दुनिया से हैं, जितने व्यू हैं उतने लोग जंतर-मंतर नहीं पहुंचेंगे. यहां पुलिस का अच्छा नियंत्रण है.
अदालत ने पूछा कि क्या स्थान बदलकर और कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी जा सकती है. एएसजी ने कहा कि इस पर निर्देश लेकर आएंगे. मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी. करणी सेना की दूसरी याचिका सोशल मीडिया अकाउंट सस्पेंड किए जाने को लेकर भी है, जिसमें इंस्टाग्राम बहाल हो चुका है, लेकिन फेसबुक और वॉट्सऐप पर अभी रोक है.