प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फरार अपराधियों की तलाश के नाम पर उनके परिजनों को परेशान करने की यूपी पुलिस कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी भगोड़े आरोपी को पकड़ने के लिए उसके माता-पिता या रिश्तेदारों पर दबाव बनाना असंवैधानिक है और यह तरीका अंग्रेजों के जमाने की आदिम पुलिसिंग जैसा है.
मामला कानपुर निवासी रिटायर्ड कैप्टन मंगल सिंह से जुड़ा है, जिनके बेटे को पंजाब के एक हत्या मामले में दोषी ठहराया गया है. दोषसिद्धि के बाद बेटा फरार चल रहा है. आरोप है कि उसकी तलाश में पुलिस लगातार मंगल सिंह के घर दबिश दे रही थी, परिवार को थाने बुलाया जा रहा था और मानसिक दबाव बनाया जा रहा था, इससे परेशान होकर मंगल सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी..
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जस्टिस जे जे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति फरार है तो उसे पकड़ने के लिए पुलिस के पास आधुनिक तकनीक, निगरानी तंत्र और कानूनी प्रक्रिया उपलब्ध है. ऐसे में परिवारजनों को बार-बार थाने बुलाना, घर पर दबिश देना या सामाजिक और मानसिक दबाव बनाना कानून सम्मत नहीं है. कोर्ट ने कहा कि पुलिस किसी नागरिक की निजता, गरिमा और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकती.
हाईकोर्ट ने पुलिस को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि याची और उसके परिवार को किसी भी प्रकार से प्रताड़ित न किया जाए. साथ ही संबंधित थाना प्रभारी को आदेश दिया गया कि वह याची की निजता का उल्लंघन न करें और केवल विधिक प्रक्रिया के तहत ही कार्रवाई करें. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपराधी को पकड़ने के नाम पर निर्दोष रिश्तेदारों को परेशान करना न्याय व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है. इस आदेश को पुलिस कार्रवाई की सीमाएं तय करने वाला अहम फैसला माना जा रहा है। कोर्ट की टिप्पणी से साफ संदेश गया है कि कानून का दायरा आरोपी तक सीमित है, उसके परिजनों तक नहीं.