नई दिल्ली: साल 1925 का दौर था. देश में अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ लड़ाई चल रही थी. 1925 में RSS की स्थापना हो रही थी! RSS के संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार ने उसी दौर में भांप लिया था, अंग्रेज़ों से आज़ाद होने के बाद भारत किस समस्या में घिरने वाला है! राष्ट्रसेवा के भाव के साथ RSS की स्थापना होती है!2025 की विजयादशमी के साथ RSS के 100 साल पूरे हो जाएंगे? पिछले कुछ दिनों से अमित शाह RSS का जिक्र खूब कर रहे हैं, अचानक नरेंद्र मोदी 30 मार्च को RSS के एक कार्यक्रम में पहुंचते हैं? तो क्या RSS को लेकर बीजेपी की कोई बड़ी तैयारी है? RSS को लेकर शाह ने क्या कहा ये सुनने से पहले थोड़ा जानिए, शाह का RSS से क्या नाता रहा.
अमित शाह का RSS से रिश्ता
शाह कहते हैं RSS जनता की भलाई और राष्ट्र हित के बारे में सोचती है! तो इसकी कहानी क्या है? शाह क्यों कहते हैं कि सेवा करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं की जान भी जाती है...शाह RSS को इसलिए प्रेरणादायी संगठन कहते हैं क्योंकि साल 2001 में गुजरात के भरूच में एक भूकंप आता है, भूकंप के बाद पीड़ितों को मदद पहुंचाने के लिए RSS के कार्यकर्ता सेना, पुलिस और NDRF के जवानों के साथ जुड़ जाते हैं! उस घटना का जिक्र कर अमित शाह भावुक हो जाते हैं! जब वही RSS के कार्यकर्ता एक दिन BJP में सत्ता के ज़रिए देश चलाते हैं तो उनमें कोई अमित शाह होता है, कोई नरेंद्र मोदी होता है, जब बीजेपी सत्ता में होती है तब भी कार्यकर्ता मदद में जुटे हैं, कई बार इनकी जान भी चली जाती है! इतना बड़ा संगठन सिर्फ साल में एक बार मिले दान से चलता है, जो आरएसएस के हेडक्वार्टर में लगे झंडे को गुरु मानकर दिया जाता है, ये शायद दुनिया का पहला ऐसा संगठन है, जहां स्वयंसेवक बनने के लिए न कोई पैसा देना होता है, न कोई फॉर्म भरना पड़ता है, नजदीकी शाखा में जाइए, और संघ से जुड़ जाइए. आज इसकी पाठशाला से निकले कई दिग्गज देश-विदेश में बड़े पदों पर हैं जिनके जीवन का अनुशासन उन्हें सफलता की नई-नई सीढ़ियों तक पहुंचा रहा है.
RSS ने देशभक्तों को दिया जन्म- शाह
तभी तो शाह कहते हैं... आरएसएस ने बीते 100 सालों में कई देशभक्त और राष्ट्रवादी विचारधाराओं के नेताओं और विचारकों को जन्म दिया, मैंने आरएसएस से देशप्रेम सीखा है. 272 से ज्यादा आरएसएस के फुल टाइम प्रचारक, जिन्होंने नॉर्थ ईस्ट में काम किया, जिनमें से 10 को अपनी जान गंवानी पड़ी, त्रिपुरा में चार लोगों की हत्या कर दी गई, ऐसी कई संस्थाएं हैं जो आरएसएस को अपना प्रेरणास्त्रोत मानती हैं. अमित शाह RSS के कार्यकर्ता हैं, इसलिए उनके हर फैसले में RSS की पृष्ठभूमि दिखाई देती है! राज्यों के मुख्यमंत्री चुनते वक्त अमित शाह RSS के किसी अनुशासित कार्यकर्ता को उठाते हैं, और CM बना देते हैं! जिसके कारण पार्टी के हर कार्यकर्ता को लगता है, कभी ना तो कभी हमारा नंबर आएगा? RSS सिर्फ अनुशासन का मास्टर है, बल्कि आंकलन और परिस्थिति के हिसाब खुद ढाल लेना भी आता है.
साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी के चेहरे पर बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिलता है तो पीएम मोदी शाह को जीत की वजह बताते हैं, लेकिन शाह से जब पूछा जाता है कि आप क्या कहेंगे तो वो सीधा RSS का नाम लेते हैं...आज संघ भी शाह का लोहा मानता है, और अमित शाह खुलकर कहते हैं उन्हें RSS तैयार किया है! लोकसभा में जब अखिलेश यादव शाह से पूछते हैं कि आपकी पार्टी इतनी बड़ी हैं फिर भी आप अध्यक्ष नहीं चुन पाते हैं तो वो सीधा कहते हैं हमारी पार्टी कार्यकर्ताओं की पार्टी है. 13-14 करोड़ में से किसी एक को चुनना होता है, आपकी तरह थोड़ी! यही कारण है शाह सियासत के मास्टर नहीं बल्कि चाणक्य कहे जाते हैं. वक्फ़ बोर्ड हो या फिर आर्टिकल 370 हर चुनौती से निपट लेते हैं.
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