मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दो हिंदू चेहरों की एंट्री हो गई है। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड अधिनियम 2025 के तहत वक्फ बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों को शामिल किया गया है, जिनका नाम मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव है। दोनों का संघ और राष्ट्रवादी विचारधारा से गहरा संबंध है।
बात करें मनोज मालपानी की, तो वह पिछले 30 वर्षों से संघ से जुड़े हैं। अपने छात्र जीवन से ही उन्होंने संघ का साथ चुना। संघ के जरिए मनोज मालपानी को सामाजिक कार्यों का भी अनुभव है और वह वक्फ बोर्ड के मामलों से काफी लंबे समय से जुड़े हुए थे।
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के दूसरे सदस्य अनिमेष भार्गव मध्य प्रदेश के गुना जिले के राघौगढ़ के रहने वाले हैं। उनके पिता मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के मित्र हैं। अनिमेष भार्गव संघ और राष्ट्रवाद की विचारधारा से प्रेरित हैं और लंबे समय से संघ के लिए काम कर रहे हैं। संघ में अपना योगदान देने के लिए अनिमेष भार्गव ने बैंक मैनेजर के पद से इस्तीफा भी दिया। फिलहाल वह भाजपा के मीडिया पैनलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं और उन्हें मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में भी शामिल किया गया है।
मध्य प्रदेश सरकार के इस फैसले का विपक्षी दल कांग्रेस और एआईएमआईएम ने जमकर विरोध किया। उनका कहना है कि वक्फ मुस्लिमों की संपत्ति एवं धार्मिक संस्थाओं से जुड़ा विषय है, इसलिए गैर-मुस्लिमों का शामिल होना हस्तक्षेप है। आगे वे कहते हैं कि अगर मठ-मंदिरों की समितियों में मुस्लिम नहीं होते, तो फिर वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों को शामिल क्यों किया जा रहा है?
केंद्र सरकार द्वारा वक्फ बोर्ड संशोधन अधिनियम-2025 के तहत वक्फ बोर्ड में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों का होना अनिवार्य किया गया है। इसके बाद मध्य प्रदेश गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड का सदस्य बनाने वाला पहला राज्य बन गया।