अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर चंदा चोरी मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें नई गठित SIT की चर्चा सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची के समक्ष हुई। इसमें SIT के कार्यभार को लेकर भी चर्चा शामिल रही। सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मामले की गहराई से जांच करने के लिए नई SIT गठित की गई है, जिसकी कमान आईजी रैंक की अधिकारी किरण एस. को सौंपी गई है। इसके अतिरिक्त टीम में एक डीआईजी, एक एसएसपी और एक पुलिस अधीक्षक भी शामिल हैं।
याचिकाकर्ता की दलील पर SIT टीम में चार्टर्ड अकाउंटेंट को शामिल करने की मांग की गई, क्योंकि मामला पैसों से संबंधित है। वित्तीय पारदर्शिता के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट का होना बेहद जरूरी है। सीजेआई सूर्यकांत ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि फॉरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाए। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, "बिल्कुल, उन्हें भी जांच दल में शामिल किया जाएगा।"
याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कोर्ट में कहा कि आम जनता ने 500 और 1000 रुपये जैसी राशियां असीम श्रद्धा से दान की थीं, लेकिन वे बिचौलियों के गबन की वजह से कभी ट्रस्ट तक पहुंच ही नहीं पाईं। देवदत्त कामत ने सुझाव दिया कि राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट को मिलने वाले दान की जानकारी एक वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाए।
सुनवाई के दौरान यह साफ हो गया कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सख्त जांच कराने के लिए तैयार है। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।