नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बड़ा संकेत दिया है. रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान ने साफ कर दिया है कि अगर उसके खिलाफ सैन्य और आर्थिक दबाव जारी रहा तो वह सिर्फ होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) ही नहीं, बल्कि अपने सहयोगी हूती विद्रोहियों के जरिए बाब-अल-मंदेब मार्ग पर भी दबाव बना सकता है.
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल व्यापार का प्रमुख रास्ता माना जाता है. ईरान की ओर से पूर्ण नाकेबंदी की धमकी ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है.
वहीं, बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और एशिया-यूरोप व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है. विश्लेषकों का कहना है कि यदि हूती समूह इस क्षेत्र में सक्रिय मोर्चा खोलता है तो वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति दोनों पर दोहरा दबाव पड़ सकता है.
हाल के दिनों में कई तेल और एलएनजी टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है. कुछ जहाजों ने सुरक्षा कारणों से अपने ट्रांसपोंडर तक बंद कर दिए, जबकि क्षेत्र में समुद्री यातायात में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है.
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज और बाब-अल-मंदेब दोनों मार्गों पर संकट गहराता है तो इसका असर भारत, चीन, जापान और यूरोप समेत उन देशों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा, जो पश्चिम एशिया से बड़े पैमाने पर तेल और गैस आयात करते हैं.