नई दिल्ली: 5 अलग-अलग ठिकानों पर करीब 50 गाड़ियां रुकती हैं, कुछ गाड़ियों पर शादी का स्टीकर चस्पा होता है, जबकि कुछ गाड़ियों में एंबुलेंस वाला सायरन बज रहा होता है, अंदर एंबुलेंस की तरह सारी सुविधा भी थी, ताकि किसी को शक न हो. शादी वाली गाड़ियों की तो बकायदा सजावट भी की गई थी, जिसमें दूल्हे का नाम सुमन और दूल्हन का नाम लिखा होता है संगीता. हर व्यक्ति बाराती के गेटअप में था. लोगों से पूछते हैं किसी शुक्ला परिवार के शादी में जाना है. एड्रेस पूछते-पूछते एक आलीशान महल के सामने रुकते हैं, जो उस शहर के बड़े कारोबारी सीताराम अग्रवाल का होता है.
वो मैरिज गार्डन, होटल और हुंडी यानि पैसे के लेन-देन का कारोबार करते हैं, जैसे ही अधिकारी इनके घर में जाने की कोशिश करते हैं वो अंदर से गेट बंद कर लेते हैं. नतीजा आसपास से बड़ी सीढ़ी मंगवाई जाती है और उसके सहारे आयकर की टीम अंदर घर में एंट्री लेती है. और वहां से जो बरामद होता है, उसे सुनकर आपकी भी आंखें खुली की खुली रह जाएंगी.
गोयल बंधू का घर और ऑफिस
रामाग्रुप के रामकुमार, सुरेश कुमार और नरेश गोयल जो सरिया और टिंबर कारोबार से जुड़े हैं, जिनके घर से करोड़ों के टैक्स चोरी की ख़बर आयकर अधिकारियों को मिली थी. 15 साल पुरानी फाइल लेकर आयकर विभाग के अधिकारी पहुंचे थे, जिसमें एक-एक रुपये का न सिर्फ हिसाब था, बल्कि इतने सालों में कितनी कमाई की और कितना टैक्स चुराया, इसका पूरा लेखा-जोखा इनके पास है, तीन साल पहले सेंट्रल जीएसटी ने भी इनके अड्डों पर छापा मारा था, इस हिसाब से आप अंदाजा लगा सकते हैं गोयल ब्रदर्स के घर छापेमारी का एक्शन कितना बड़ा है.
जबकि तीसरा अड्डा था, कॉन्ट्रैक्टर अतुल मल्होत्रा का ऑफिस. अतुल मल्होत्रा बिल्डिंग निर्माण से जुड़े ठेकेदार हैं, जिनके ऑफिस से लेकर औद्योगिक क्षेत्र तक के ठिकानों पर टीम ने छापा मारा, जहां पता चला सतना से लेकर भोपाल तक इन्होंने कई संपत्तियां खरीद रखी हैं. एक ठेकेदार भ्रष्टाचार का कितना बड़ा गुर्गा होता है, इसका अंदाजा आप गांव में बनने वाली सड़क और सरकारी स्कूलों से लगा सकते हैं. जहां कुछ ही महीनों में सड़कें गड्ढे में तब्दील हो जाती है और बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने लगता है. अतुल मल्होत्रा के पास तो रेलवे विभाग के भी कई ठेके थे, जिसका मतलब है इन्होंने जमकर काली कमाई की है, जिसे खंगालने में अधिकारियों को एक दो नहीं बल्कि तीन-चार दिनों का वक्त लगने वाला है.
इनके अलावा चौथा अड्डा था, सुनील सेनानी का एजुकेशन अड्डा. सुनील सेनानी लंबे वक्त से शिक्षा जगत से जुड़े हैं, ये न सिर्फ बिट्स कॉलेज के मालिक हैं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र से भी ये बड़ी कमाई कर रहे हैं, इसके अलावा गुटखा कारोबार में भी सुनील सेनानी का अपने इलाके में बड़ा नाम है. इसलिए अधिकारी एक-एक रुपये का हिसाब जुटाने में जुटे हैं. जबकि आखिरी और पांचवां अड्डा था, संतोष गुप्ता की मिल.
फ्लोर मिल यानि आटा चक्की चलाने वाले संतोष गुप्ता के ठिकानों पर जब आयकर अधिकारी पहुंचे तो वो ये देखकर दंग रह घए कि आटा चक्की चलाने वाले गुप्ताजी इतने अमीर अचानक से कैसे बन गए. जरूर कोई बड़ा खेल चल रहा है, इन पाचों जगहों से आयकर विभाग के अधिकारियों ने लैपटॉप, मोबाइल और कई सीक्रेट दस्तावेज जब्त किए हैं, जिनका हिसाब मिलाने के बाद इन आरोपियों की न सिर्फ संपत्ति जब्त हो सकती है, बल्कि इन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है. इन सबकी गिनती मध्य प्रदेश के बड़े कारोबारियों में होती हैं.
किसी ने आलीशान मकान बनवा रखा है तो किसी ने करोड़ों की जमीन ले रखी है. आयकर विभाग को ये पुख्ता खबर मिली थी कि एक खास व्यक्ति के इशारे पर इन पांचों ने मिलकर जमीन खरीदी है, जिसकी कीमत करोड़ों में है, सूचना जुटाने और इंफॉर्मेशन को पुख्ता करने के बाद अधिकारियों ने प्लान बाराती बनाकर ऐसा छापा मारा कि कईयों के दुकानों पर अब भी ताला लटक रहा है.
कई भ्रष्ट व्यापारी दुकान खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. उन्हें लग रहा है कि कहीं मेरे यहां भी न छापा पड़ जाए. आयकर विभाग का ये एक्शन बताता है आप कितनी भी चालाकी कर लें और करोड़ों की कमाई कर लें. अगर टैक्स चोरी की है तो फिर सरकारी रडार से नहीं बच पाएंगे.