नई दिल्ली: छांगुर ऊर्फ जलालुद्दीन के राज अब मुर्दे खोलेंगे, क्योंकि उसके घर के पीछे एक सीक्रेट कब्रिस्तान मिला है, और इस कब्रिस्तान में जो चीजें मिली हैं, उसने सुरक्षा एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है. पता ये भी चला है कि जो लड़कियां छांगुर की बात नहीं मानती थी, उन्हें कहता था घर के पीछे वाली कब्रिस्तान में पहुंचा दूंगा, जो लड़कियां योगी-मोदी सरकार का नाम लेती, उन्हें कहता देख लूंगा कौन से योगी-मोदी तुम्हें बचाएंगे, हमारे लोग तुम्हें कब्रिस्तान में पहुंचाकर ही दम लेंगे.

ये है छांगुर का वो मकान, जिस पर योगी सरकार ने बुलडोजर चलवाया, लेकिन इस मकान के पीछे क्या है, ये सुनेंगे तो पैरों तले जमीन खिसक जाएगी, जब बुलडोजर लेकर टीम पहुंची थी तो घर के अंदर मजार होने की जानकारी भी मिली थी, लेकिन अब पता चला है छांगुर ऊर्फ जलालुद्दीन के घर के पीछे एक कब्रिस्तान है, और ये कब्रिस्तान कोई सामान्य नहीं, बल्कि सीक्रेट कब्रिस्तान है, जहां एक न्यूज चैनल की टीम पहुंची तो उसे 50-100 बॉडी होने की बात मिली, पर ये हैरानी की बात नहीं है, बल्कि हैरानी की बात है एक लड़की का खुलासा, जिसे छांगुर के गुर्गों ने अपने जाल में फंसाया था, उसके हवाले से रिपब्लिक भारत लिखता है, ''छांगुर ने उसे कहा ता अगर तुम बात नहीं मानोगी तो मैं तुम्हें अपने बलरामपुर वाले घर के कब्रिस्तान में दफन करवा दूंगा. देखते हैं कौन से योगी और मोदी तुम्हें बचाएंगे''?
जिसके बाद सवाल ये भी उठ रहे हैं क्या छांगुर को सरकार, पुलिस-प्रशासन या ईडी-सीबीआई किसी का डर नहीं था, आखिर छांगुर किसके दम पर ये सब कर रहा था, इसका भी अब चौंकने वाला जवाब सामने आया है.
हिंदुस्तान अपनी रिपोर्ट में दावा करता है...
जांच एजेंसियां अब उस होटल के सीसीटीवी फुटेज और एंट्री-एग्जिट डायरी के सहारे ये भी पता कर सकती है कि वहां छांगुर से मिलने कौन लोग पहुंचते थे, और पूरी कहानी क्या थी. चूंकि बीते दिनों छांगुर की तरह ही आगरा का भी एक गिरोह पकड़ा गया है, जिसका कई देशों से नाता मिला, कई देशों से उसकी फंडिंग की जानकारी सामने आई तो सवाल ये भी है कि क्या छांगुर का उस गिरोह से भी कोई नाता था, क्योंकि दोनों का मकसद लगभग एक ही था. फिलहाल छांगुर ईडी की रिमांड में है, और वहां उसने जो चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, उसके बाद कई नए नाम सामने आने की भी उम्मीद है. पर इतनी बड़ी जांच, सवालों की लिस्ट और कार्रवाई के बीच एक बड़े सवाल जवाब कोई नहीं देता कि आखिर इतनी सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया एजेंसियों की सतकर्ता के बावजूद छांगुर और उसके गुर्गे कैसे इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे रहे थे और किसी को कानों-कान खबर नहीं लग रही थी. लोकल इंटेलिजेंस यूनिट से लेकर बड़ी-बड़ी एजेंसियों के अधिकारी तब कहां सो रहे थे, क्या उनकी भी कोई जिम्मेदारी तय होगी.