नई दिल्ली: मध्य पूर्व में तेज होते तनाव के बीच कुवैत अब पाकिस्तान के साथ एक मजबूत सैन्य गठबंधन की ओर बढ़ रहा है. ईरान के 1,400 से ज्यादा ड्रोन और मिसाइल हमलों से बुरी तरह प्रभावित कुवैत, पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब वाली तरह का 'म्यूचुअल डिफेंस पेक्ट' करने की कोशिश कर रहा है. पाकिस्तान ने पिछले साल सऊदी अरब के साथ NATO-स्टाइल रक्षा समझौता किया था, जिसमें दोनों देशों ने एक-दूसरे की रक्षा करने का वादा किया था.
अब कुवैत भी उसी तर्ज पर पाकिस्तान से हज़ारों सैनिकों, लड़ाकू विमानों, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम की मांग कर रहा है. कुवैत पहले से ही पाकिस्तान के साथ एक व्यापक रक्षा सहयोग समझौते को मंजूरी दे चुका है, जिसमें सैन्य प्रशिक्षण, खुफिया जानकारी साझा करना, लॉजिस्टिक्स और संयुक्त सैन्य अभ्यास शामिल हैं. लेकिन अब वह इससे आगे बढ़कर पूर्ण रक्षा गठबंधन चाहता है.
हालांकि पाकिस्तान इस प्रस्ताव पर पूरी तरह सहमत नहीं दिख रहा. इस्लामाबाद को चिंता है कि इससे वह अमेरिका-ईरान युद्ध में सीधे खिंच सकता है. पाकिस्तानी अधिकारी कह रहे हैं कि फिलहाल लड़ाकू सैनिकों की तैनाती संभव नहीं है. कुवैत में अमेरिकी सैन्य अड्डे होने और ईरान के हमलों के बावजूद अमेरिका द्वारा सुरक्षा न मिल पाने के कारण कुवैत पाकिस्तान की ओर रुख कर रहा है.
पाकिस्तान को बदले में ऊर्जा सहयोग और निवेश की पेशकश की जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान, जो दुनिया का इकलौता परमाणु इस्लामी देश है और बड़ी सेना रखता है, फिलहाल मध्य पूर्व के छोटे देशों की सुरक्षा की गारंटी बनता जा रहा है.