
...ये है कुख्यात बदमाश तौसीफ बादशाह, जिसे बिहार एसटीएफ ने फुलवारीशरीफ से पारस अस्पताल कांड में उठाया है, यही उस घटना का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, सारे बदमाश जहां चेहरे पर मास्क लगाए हुए थे, तो वहीं तौसीफ बिना मास्क के आगे-आगे चल रहा था, क्या इसके पीछे भी इसकी कोई मंशा थी, पारस अस्पताल के कमरा नंबर 209 में यही सबसे पहले दाखिल होता है, विरोधी चंदन को निशाना बनाता है और फिर सबके साथ फरार हो जाता है, इधर इसे पकड़ा जाता है उधर इसकी तुलना कई लोग लॉरेंस से करने लगते हैं.
सोशल मीडिया पर तौसीफ बादशाह नाम से एक अकाउंट भी है, जिस पर एक पोस्ट में इसने लिखा, ''लोगों के आगे पीछे करके बदमाश नहीं बना हूं. महफिल खाली करा दी है जहां भी अकेला घुसा हूं.'' उससे पहले 18 मार्च को इसी अकाउंट से एक पोस्ट हुआ था जिसमें लिखा था आंखों में बैठी शांति अवसर के तलाश में है, सीने बैठी अशांति युद्ध के इंतजार में. बिहार पुलिस ये दावा भी कर रही है कि बड़ी ही सोची समझी प्लानिंग के तहत इस घटना को अंजाम दिया गया, तो क्या इस पोस्ट का भी प्लानिंग से कोई लेना देना है.
तौसीफ अपराधी क्यों बना, कैसे बना, इसकी कोई खास कहानी नहीं मिलती, लेकिन ऐसी ख़बरें हैं कि जमीन कब्जा कराने और छोटी-मोटी घटनाओं को अंजाम देने के बाद ये लोगों की सुपारी लेने लगा, और फुलवारीशरीफ का कुख्यात बदमाश बन गया. जिस चंदन मिश्रा के साथ पारस अस्पताल में इसने घटना को अंजाम दिया, उससे इसकी कोई निजी दुश्मनी थी या नहीं, ये अब तक पता नहीं चला है लेकिन शेरू गैंग के गुर्गों के साथ मिलकर इसने पूरे बिहार को हिला दिया, इसलिए ये कहा जा रहा है कि ये शेरू गैंग का गुर्गा है. जिन पांच बदमाशों ने इस घटना को अंजाम दिया है, उसकी पहचान भी इसके पकड़े जाने के साथ हो चुकी है.
सूत्रों का दावा है कि पहला नाम फुलवारीशरीफ के कुख्यात तौसीफ रजा ऊर्फ तौसीफ बादशाह का है. दूसरा अकिब मलिक, तीसरा सोनू, चौथा कालू ऊर्फ मुस्तकीम और पांचवां बलवंत है. यहां बलवंत ऊर्फ भिंडी बक्सर का ही रहने वाला है. कहा ये भी जा रहा है कि शेरू और चंदन मिश्रा जो पहले एक ही गैंग में थे.
दोनों के बीच कुछ मसलों पर कहासुनी हुई और जातिवादी वर्चस्व में इन लोगों ने अलग-अलग गैंग बना लिया, और उसके बाद इस घटना को अंजाम दिया गया. लेकिन तौसीफ बादशाह जिस टशन में दिखा है, सीसीटीवी फुटेज में जैसे उसका चेहरा दिखा है, न कोई खौफ और ना कोई चिंता, वो साफ इशारा कर रहा है ये बिहार में अपराध का नया पर्याय बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है, जिसे बिहार पुलिस को हर हाल में रोकना होगा, ताकि कोई दूसरा लॉरेंस पैदा न हो, जैसे यूपी में माफियाओं को मिट्टी में मिलाया गया, वैसे ही बिहार के माफियाओं को भी मिट्टी में मिलाना होगा, वरना आम जनता की सुरक्षा हर वक्त खतरे में रहेगी.