एक तरफ है मौलाना अब्दुल सलीम कासमी का गुस्सैल चेहरा, जो योगी की मां का नाम लेकर विवादित बोल रहा है, तो दूसरी तरफ है उसकी लंगड़ाती तस्वीर...जिसमें उसकी अकड़ नहीं बल्कि अफसोस दिख रहा है, पूरा शरीर झुका हुआ, चेहरे पर मास्क लगा हुआ, बदन पर पायजामा-कुर्ता और पुलिसकर्मी के सहारे चलता हुआ बाहर निकल रहा है...जिसे देखकर कई लोग पूछ रहे हैं क्या थाने में मौलाना को पुलिस ने थर्ड डिग्री दिया है, आखिर मंच से गरजने वाले मौलाना ही कुछ ही घंटों में ऐसी हालत कैसे हो गई..
जिसे लग रहा था योगीजी यूपी के सीएम हैं, उनकी मां के बारे में बिहार में रहकर बोलूंगा तो कोई नहीं पकड़ पाएगा, आज न वो सिर्फ सलाखों के पीछे है, बल्कि हाथ जोड़कर माफी भी मांग रहा है, जरा उसका पूरा वीडियो सुनिए, फिर बताते हैं सलाखों के पीछे इसकी रात कैसी गुजरी...
मैं अब्दुल सलीम कासमी, अपने जुर्म का एहतराम कर रहा हूं. 5 मई 2024 को जिला भागलपुर की एक बस्ती में एक समाज सुधार तालमी कॉन्फ्रेंस में मैं हाजिर हुआ था. मेरी स्पीच हुई थी. जहां मेरी जुबान से कुछ ऐसी बातें निकली, उत्तर प्रदेश के सीएम साहब के माता के लिए, जो मेरी जुबान से नहीं निकलना चाहिए था. मैं अपनी इस गलती का बिल्कुल हाथ जोड़कर एहतराम करता हूं. माफी मांगता हूं कि आइंदा ये गलती हमसे नहीं होगी...
ये बिहार का वही मौलाना है, जिसने गौमाता पर बोलते हुए योगी की मां को लेकर विवादित टिप्पणी की थी, वैसे तो इस मौलाना की कई टिप्पणियों पर सवाल उठे हैं, और उससे सुर्खियां भी मिली है, लेकिन इस बार मौलाना ने गलत बयान करके खुद ही पुलिस को न्यौता दे दिया. नतीजा यूपी एसटीएफ की एक टीम बिहार पहुंचती है, वहां सादी वर्दी में जाकर इस मौलाना को पकड़कर गाड़ी में बिठाती है और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा कर जब यूपी लेकर आती है तो मौलाना के इलाके में सनसनी फैल जाती है. लोग पूछने लगते हैं कि मौलाना को आखिर ले कौन गया, वहां के लोगों को लगता है किसी ने मौलाना को यूं ही उठा लिया, लेकिन बाद में जब ओवैस की पार्टी के नेता पता करवाते हैं, तो जानकारी मिलती है यूपी एसटीएफ की गोरखपुर यूनिट ने इस मौलाना को गिरफ्तार किया है, और अब लेकर यूपी गई...जहां उसके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हैं...मीडिया रिपोर्ट दावा करती है
मौलाना अब्दुल सलीम कासमी के एक-दो घंटे की तकरीर का चार्ज 50 हजार से 1 लाख रुपये तक है.
बिहार के अररिया जिले के जोकीहाट के रहने वाले मौलाना की फैन फॉलोइंग काफी अच्छी है
मौलाना अब्दुल्ला ने सहारनपुर के दारुल उलूम देवबंद मदरसे से पढ़ाई- लिखाई की है, विचारधारा देवबंदी है.
लेकिन जब से मौलाना ने योगी की मां को लेकर टिप्पणी की है, कई मुस्लिम भी इनके खिलाफ हो गए, और पूछने लगे कि कोई किसी की मां पर ऐसी टिप्पणी कैसे कर सकता है, और मौलाना अब्दुल सलीम कासमी ने तो अपने नाम के चतुर्वेदी भी लिखा है, अपनी तकरीरों में संस्कृत के श्लोक का भी जिक्र करते हैं, लेकिन चार वेद छोड़िए एक भी पढ़ा होता तो शायद गौमाता या मां को लेकर ऐसी टिप्पणी नहीं करते, क्योंकि वेद तो हर व्यक्ति को यही सीखाता है मातृ देवो भव: