नई दिल्ली: कौन हैं अशोक सिद्धार्थ, जिनकी वजह से आकाश आनंद का सियासी करियर शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया. अशोक सिद्धार्थ ने ऐसी क्या गलती कर दी, जिसका खामियाजा मायावती के भतीजे को शायद जिंदगी भर भुगतना पड़ेगा. 30 साल के आकाश आनंद, जिन्हें अब तक बहनजी के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा था, उन्हें न सिर्फ मायावती ने एक झटके में सियासी पंगु बना दिया, बल्कि उनकी इज्जत की भी पूरी तरह से छज्जियां उड़ा दीं. लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेस हो रही थी, मायावती ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि आकाश को नेशनल कॉरीडेनरट के पद समेत सभी जिम्मेदारियों से मुक्त किया जा रहा है.
उनके पिता आनंद कुमार और राज्यसभा सांसद राम जी गौतम अब नेशनल कॉरीडेनरट की जिम्मेदारी संभालेंगे, लेकिन सवाल ये है कि अचानक ऐसा क्या होगा कि मायावती को इतना बड़ा फैसला लेना पड़ा. कहना पड़ा कि जब तक वो जिंदा हैं, तब तक उनका उत्तराधिकारी कोई नहीं बनेगा. यहां एंट्री होती है अशोक सिद्धार्थ की.
कौन हैं अशोक सिद्धार्थ?
अशोक सिद्धार्थ की गिनती कभी बहुजन समाज पार्टी के कद्दावर नेताओं में हुआ करती थी. वो बहुजन समाज पार्टी से राज्यसभा सांसद और MLC भी रहे हैं और बसपा में उन्होंने कई बड़ी जिम्मेदारियां निभाई हैं. बताया जाता है कि अशोक के पिता काशीराम के साथ जुड़े थे और उनके काफी करीबी भी थे. इसके बाद अशोक भी बसपा के साथ जुड़ गए. जानकार बताते हैं कि मायावती के कहने पर ही अशोक सिद्धार्थ ने नौकरी से इस्तीफा देकर बहुजन समाज पार्टी का दामन थामा था और पार्टी-मूवमेंट के साथ जुड़ थे. अशोक सिद्धार्थ को मायावती के भाई आनंद कुमार का भी काफी करीबी दोस्त माना जाता है. रिश्ते इस कदर मजबूत रहे हैं कि मायावती ने खुशी-खुशी अपने भतीजे आकाश आनंद की शादी अशोक की बेटी प्रज्ञा से करवाई थी, लेकिन अब ये सब इतिहास बन चुका है. मायावती के करीबियों में गिने जाने वाले अशोक को अब बहनजी देखना तक पसंद नहीं करती.
हालांकि इसके पीछे एक बड़ी वजह है. पिछले दिनों मायावती ने पार्टी विरोधी गतिविधियों और पार्टी में गुटबाजी करने के आरोप में अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था. इसके बाद मायावती ने अशोक के दामाद और अपने भतीजे आकाश आनंद को भी सभी पदों से हटा दिया है. एक साल के अंदर ये दूसरी बार है, जब आकाश को मायावती के गुस्से का शिकार होना पड़ा है.
सबसे पहले मायावती ने 10 दिसंबर, 2023 को यूपी-उत्तराखंड के नेताओं की बैठक बुलाई थी. जिसमें उन्होंने आकाश को उत्तराधिकारी घोषित करते हुए पार्टी की विरासत और राजनीति को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी थी. हालांकि 7 मई, 2024 को आकाश की गलतबयानी की वजह से मायावती ने उनसे सभी जिम्मेदारियां छीन ली. आकाश को अपने उत्तराधिकारी पद के साथ ही नेशनल कोऑर्डिनेटर पद से भी हटा दिया. तब मायावती ने कहा था कि आकाश अभी परिपक्व नहीं हैं. लेकिन इस सियासी घटना के 47 दिन बाद मायावती ने अपना फैसला पलट दिया और 23 जून 2024 को उन्होंने फिर भतीजे आकाश को अपना उत्तराधिकारी बनाया और नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी भी सौंपी. अब एक बार फिर मायावती ने आकाश से सारी जिम्मेदारियां छीन ली हैं.
हालांकि इस बार आकाश पर हुई कार्रवई के लिए अशोक सिद्धार्थ को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. मायावती ने तो खुले तौर पर कह दिया है कि अशोक ने ही आकाश के राजनीतिक करियर को नुकसान पहुंचाया है. मायावती का ये कहना कि बदले हालात में आनंद कुमार ने अपने बच्चों का रिश्ता गैर-राजनैतिक परिवार के साथ जोड़ने का निर्णय लिया है, जिससे अशोक सिद्धार्थ की तरह अब आगे कभी भी पार्टी को किसी भी प्रकार से कोई नुकसान न हो सके.
तस्वीर को काफी हद तक साफ करता है, लेकिन मायावती की नाराजगी की एक और वजह, जो शायद खुलकर नहीं बताई जा रही है, वो अशोक सिद्धार्थ के बेटे की शादी भी रही, जिसमें आकाश आनंद की मौजदूगी ने बहनजी को सख्त फैसला लेने पर मजबूर कर दिया. शायद यहीं वजह है कि मायावती को कहना पड़ गया कि ये देखना जरूरी होगा कि अशोक सिद्धार्थ की बेटी पर उनके विचारों का कितना असर पड़ता है और वो आकाश आनंद को कितना प्रभावित कर सकती हैं. बहरहाल, मायावती के मौजूदा फैसले ने न सिर्फ हर किसी को हैरान किया है, बल्कि 27 को लेकर भी एक बड़ा संदेश दे दिया है. संदेश ये कि मायावती खुद इस चुनाव में आगे रहने वाली हैं, जोकि विरोधियों के लिए अच्छी खबर नहीं है.