मेरठ : उत्तर प्रदेश के मेरठ में SSP-SOG कार्यालय में दो नेताओं के साथ कथित मारपीट और थर्ड डिग्री के आरोपों के मामले में पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. जांच के दौरान पुलिस ने नेताओं के साथ मारपीट किए जाने की बात स्वीकार की है, इसके साथ ही पुलिस की ओर से बताई जा रही स्कूटी एक्सीडेंट की थ्योरी को भी अब खुद पुलिस ने नकार दिया है.
मामले में कार्रवाई करते हुए इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ समेत कुल आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है. इनमें दारोगा मुलायम सिंह, महिला सिपाही नीलम, सिपाही हरिओम और मुकेश कुमार के अलावा श्यामबाबू, सुमित और ललित भी शामिल हैं. आरोप है कि इन पुलिसकर्मियों ने SSP-SOG कार्यालय में नेताओं के साथ मारपीट की और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया.
मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। शुरुआती तौर पर घटना को स्कूटी दुर्घटना से जोड़कर देखने की कोशिश की गई थी, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने इस थ्योरी को ही खारिज कर दिया. इसके बाद अधिकारियों ने मामले में शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच शुरू की.
बताया जा रहा है कि ADG के आदेश पर पूरे मामले की जांच कराई जा रही है. इस जांच की जिम्मेदारी सहारनपुर DIG अभिषेक सिंह को सौंपी गई है. DIG की जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि नेताओं को SOG कार्यालय क्यों बुलाया गया, वहां उनके साथ क्या हुआ और मारपीट में कौन-कौन पुलिसकर्मी शामिल थे.
पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किए जाने के बाद अब जांच रिपोर्ट पर सबकी नजर है. माना जा रहा है कि जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आगे भी विभागीय और कानूनी कार्रवाई हो सकती है. मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली और हिरासत में पूछताछ के तरीके को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.