कोलकाता : पश्चिम बंगाल में जाति प्रमाणपत्रों को लेकर बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. राज्य सरकार ने साल 2011 से अब तक जारी सभी SC, ST और OBC जाति प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच कराने का फैसला लिया है. इस फैसले के बाद बंगाल की राजनीति में घमासान तेज हो गया है.
जानकारी के मुताबिक, पिछले 15 वर्षों में करीब 1.69 करोड़ जाति प्रमाणपत्र जारी किए गए थे, इनमें लगभग 1 करोड़ SC, 21 लाख ST और 48 लाख OBC प्रमाणपत्र शामिल हैं. सरकार को कई शिकायतें मिली थीं कि कुछ प्रमाणपत्र गलत दस्तावेजों और कथित फर्जी दावों के आधार पर बनाए गए. इसी के बाद बैकवर्ड क्लास वेलफेयर विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को पुराने प्रमाणपत्रों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं.
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस मुद्दे को बड़ा घोटाला बताते हुए आरोप लगाया कि आरक्षण व्यवस्था का गलत इस्तेमाल किया गया और असली हकदारों के अधिकारों पर असर पड़ा. बीजेपी लगातार दावा कर रही है कि फर्जी तरीके से OBC और SC प्रमाणपत्र बनवाकर सरकारी योजनाओं और नौकरियों में लाभ लेने की कोशिश हुई.
सरकारी आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर जांच के दौरान कोई प्रमाणपत्र गलत तरीके से जारी पाया गया, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. खास बात यह है कि “दुआरे सरकार” कैंपों के जरिए जारी हुए लाखों प्रमाणपत्र भी जांच के दायरे में आएंगे.