
...यह तस्वीर है मानसून सत्र के दूसरे हफ्ते के पहले दिन की, जहां संसद भवन के बाहर सैकड़ों की संख्या में एनडीए के सांसद खड़े हैं, जिन्होंने हाथों में एक-एक तख्तियां पकड़ रखी है, जिस पर लिखा है महिला का अपमान नहीं सहेंगे, नहीं सहेंगे. महिला विरोधी मानसिकता नहीं सहेंगे, ऐसे ही कई नारे बीजेपी के सांसद संसद भवन के बाहर लगा रहे थे, क्योंकि समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव के खिलाफ बीते दिनों एक मौलाना ने भद्दा कमेंट किया है.
एक टीवी डिबेट में मौलाना ने जो कहा वो हम आपको सुना नहीं सकते, बस इतना बता सकते हैं कि इस कमेंट के बाद मौलाना साजिद रशीदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया है, और अब जेल भी हो सकती है. साजिश रशीदी ने ये टिप्पणी डिंपल यादव की मस्जिद वाली फोटो को लेकर की है, जब अखिलेश यादव अपने सांसदों के साथ संसद भवन की पास वाली मस्जिद में गए थे, जिसे लेकर बीजेपी ने कहा अखिलेश यादव ने वहां मीटिंग कर ठीक नहीं किया, जबकि सपा ने कहा मीटिंग नहीं बस मुलाकात की थी. उसके बाद डिंपल यादव के सिर न ढंकने को लेकर भी सवाल उठे, पर मौलाना साजिद रशीदी ने जो टिप्पणी की है, वो सबसे ज्यादा आपत्तिजनक है.
कौन है मौलाना साजिद रशीदी?
अब डिंपल यादव की तस्वीर पर कहा वहां एक और महिला मौजूद थीं, जिन्होंने सिर ढंका था, जबकि डिंपल को लेकर आपत्तिजनक बात कही. जिसे लेकर लखनऊ के विभूतिखंड थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है. वहां के इंस्पेक्टर के हवाले से ईटीवी भारत लिखता है, ''मौलाना रशीदी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 79, 196, 197, 299, 352, 353 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया है. जांच जारी है.'' मौलाना साजिद रशीदी पर समाजवादी पार्टी नेता प्रवेश यादव ने दर्ज लखनऊ में FIR दर्ज कराई है.
जो धाराएं मौलाना रशीदी पर लगाई गई हैं, सबमें अलग-अलग सजा निर्धारित है, अधिकतम 5 साल की सजा और 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. लेकिन ये बात चौंकाने वाली है कि एक तरफ समाजवादी पार्टी के ही एक नेता ने मौलाना के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया, तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव अब तक चुप्पी साधे हुए हैं, क्या सिर्फ इसलिए कि कहीं उनका वोटबैंक न छिटक जाए, एनडीए गठबंधन के जो सांसद संसद भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे, उन्होंने भी अखिलेश यादव की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं.
संसद भवन के बाहर अखिलेश यादव जब मीडिया के सामने आते हैं तो वो ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बीजेपी सरकार पर सवाल तो उठाते हैं पर मौलाना पर कुछ नहीं कहते, वो कहते हैं, ''हम ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सशस्त्र बलों की बहादुरी और पराक्रम के लिए उन्हें बधाई देते हैं। अगर उन्हें मौका मिलता, तो वे पीओके पर भी कब्जा कर लेते. पहलगाम हमले से पहले एक और घटना हुई थी जिसके बारे में जनता को अभी तक जानकारी नहीं दी गई है. सरकार को जवाब देना चाहिए.''