गोरखपुर : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में पशु तस्करों के द्वारा नीट (NEET) के छात्र की हत्या किए जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या कार्रवाई के बावजूद भी पशु तस्करी जारी है. पुलिस के द्वारा पशु तस्करों पर कार्रवाई भी की जाती है. उसके बाद भी पशुओं की तस्करी जारी है. पूर्वांचल से लेकर बिहार तक पशु तस्करों का नेटवर्क फैला हुआ है. पैसे के लालच में नए युवा इस व्यवसाय से जुड़ रहे हैं. जिले से होती हुई गाड़ियां बॉर्डर पर पहुंचती है और वहां से बिहार निकल जाती है.
गोरखपुर ही नहीं पशु तस्कर गैंग का नेटवर्क संतकबीरनगर नगर, देवरिया, महराजगंज, सिद्धार्थनगर और बस्ती तक फैला हुआ है. सभी जिलों से पशुओं की तस्करी होती है. पुलिस के द्वारा कई बार तस्करों को पकड़ने के बाद किए गए खुलासे में यह तथ्य सामने आए हैं. सबसे चौकाने वाली बात यह है कि इस कारोबार से पुराने अपराधी दूरी बना रहे हैं. नए युवा शामिल हो रहे हैं. मोटी रकम और लालच में अंधे होकर तस्करी करते हैं. चोर, गाड़ी मालिक, चालक और लोकेशन सभी जगहों पर ज्यादातर 20 से 30 वर्ष के उम्र के लोग काम करते हैं.
एक गाड़ी से पशु पहुंचाने के मिलते हैं छह लाख
सूत्रों की माने तो एक गाड़ी पशुओं की तस्करी करने पर पांच से छह लाख तक कमाई होती है. पैसे का मोटा हिस्सा गाड़ी मालिक करीब एक लाख गाड़ी मालिक, पांच-पांच हजार गाड़ी चालक व पशुओं को उठाने वाले को बाकी पैसे दिए जाते हैं. सूत्रों की माने तो पशुओं को बिहार के बॉर्डर पर सुनसान जगह पर रखा जाता है. समय बेहतर होने के बाद बिहार तस्करी की जाती है. बिहार से असम व पश्चिम बंगाल भेज दिए जाते हैं.
7 वर्षों के अबतक गोरखपुर में 523 तस्कर हुए चिन्हित
गोरखपुर जिले में 7 वर्षो में अबतक 523 पशु तस्कर चिन्हित हुए हैं. इनके ऊपर तस्करी में शामिल होने या मास्टरमाइंड होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. वहीं, कई पशु तस्करों को एनकाउंटर में भी गिरफ्तार किया है. गोरखपुर में पशु तस्करी रोकने के लिए 12 पिकेट बनाए गए, लेकिन प्रशासन की सारी योजना फेल हो गई और तस्करों ने बड़े कांड को अंजाम दे दिया.