मुंबई: महाराष्ट्र के वाशिम जिले में 15 साल पुराने कस्टोडियल डेथ मामले में कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया है. वाशिम जिला एवं सत्र न्यायालय ने 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. इनमें उस समय रिसोड पुलिस स्टेशन के इंचार्ज महादेव माणिक धांडे सहित अन्य अधिकारी और कांस्टेबल शामिल हैं. 10 मई 2011 को बेग्या पवार (23 वर्ष) नामक युवक को चोरी के एक मामले में पूछताछ के लिए रात 3 बजे घर से उठाकर पुलिस स्टेशन लाया गया.
परिवार के मुताबिक, युवक का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था. पुलिस स्टेशन में उसकी बुरी तरह पिटाई की गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. अगले दिन अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बेग्या पवार के शरीर पर 43 चोटें और कई फ्रैक्चर पाए गए, जो क्रूर यातना की पुष्टि करते थे. बेग्या के माता-पिता ने उसी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने मना कर दिया क्योंकि शिकायत में स्टेशन इंचार्ज का नाम था.
इसके बाद परिवार और पारधी समुदाय के लोगों ने लंबे समय तक प्रदर्शन किए. अंत में मामला महाराष्ट्र CID को सौंपा गया. CID की जांच में पुलिस की क्रूरता साबित हुई और चार्जशीट दायर की गई. 15 साल तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने सभी 9 आरोपियों को हत्या, गैरकानूनी हिरासत और गंभीर चोट पहुंचाने का दोषी पाया. कोर्ट ने कहा कि यह “बहुत गंभीर और क्रूर कृत्य” था, जो कर्तव्य के दायरे में नहीं आता.
फैसले पर परिवार की प्रतिक्रिया
बेग्या पवार के बुजुर्ग माता-पिता ने फैसले पर राहत व्यक्त करते हुए कहा, ''15 साल इंतजार के बाद आखिरकार हमें न्याय मिला है.'' मां ने कोर्ट, अभियोजन पक्ष और CID टीम को धन्यवाद दिया. सभी 9 दोषियों को फिलहाल वाशिम जेल में रखा गया है, जल्द ही उन्हें अमरावती जेल भेजा जाएगा. दो दोषी पुलिसकर्मी अब रिटायर हो चुके हैं.