वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 जुलाई को संसद में आम बजट पेश किया. देखा जाये तो ये मोदी सरकार 3.0 का पहला बजट है. आमतौर पर केंद्रीय बजट को फरवरी महीने में पेश किया जाता है लेकिन इस बार दो बार बजट पेश हुआ जो मंगलवार को किया गया.. ऐसे में सवाल ये भी है कि दुबारा बुगट पेश करने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?
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बता दें कि यूनियन बजट कई नई चुनौतियों के साथ और योजनाओं के साथ पेश किया जाता है.. जिसमे देश के खर्चो का निवेश का ब्यौरा होता है.. अंतरिम बजट का लक्ष्य होता है कि नई सरकार कोएक बेहतर स्थिति देना ताकि वो एक नए कार्यकाल की अच्छी से शुरुआत कर सके.. दूसरी ओर यूनियन बजट नई सरकार बनने के बाद जुलाई महीने में ही पेश किया जाता है लेकिन शर्त होती है अगर फरवरी में अंतरिम बजट आया हो तो तभी जुलाई में यूनियन बजट पेश होता है..
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आसान भाषा में समझे तो इस बार फरवरी में अंतरिम बजट इसलिए पेश हुआ, क्योंकि चुनाव अप्रैल से लेकर मई तक थे.. अंतरिम बजट के जरिये नए साल का कारोबारी सरकार बनने के संभावित समय तक बचे हुए महीनों के लिए खर्च की अनुमति संसद से ली जाती है... फिर चुनाव होने के बाद नया बजट लाया जाता है.. जिसे पूर्ण बजट भी कह सकते हैं..
बता दें कि अप्रैल 2024 से जुलाई 2024 यानी 4 महीने में जो खर्च होने थे, उसकी अनुमति संसद से ली गयी थी.. अब बाकी बचे हुए खर्चो के लिए पूर्ण बजट लागू हुआ है.. इस तरह अगस्त 2024 से मार्च 2025 तक के समय के लिए अब जुलाई में पूर्ण बजट लागू हुआ है...
बता दें कि हमेशा से ही ये परम्परा रही है कि अंतरिम बजट में कोई बड़ी घोषणा नहीं की जाती... लेकिन कई वित्त मंत्री ने जरूरत का हवाला देकर अंतरिम बजट में कई बड़ी घोषणाएं की... हालांकि ये काम पहले भी हो चूका है.. यूपीए सरकार में जब वित्त मंत्री पी चिंदबरम ने 2014 -15 में अंतरिम बजट को पेश किया था... इससे पहले अटल सर्कार में भी साल 2004 सेलेकर 2005 का अंतरिम बजट पेश किया गया था... ख़ास बात ये है कि कोई भी कानून सरकार को अंतरिम बजट में बड़ा एलान करने से नहीं रोक सकता.. अगर सरकार चाहे तो वो अंतरिम बजट एलान कर सकती है...