मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय बजट 2024-25 की जमकर आलोचना की थी. राहुल ने वित्त मंत्री पर खोखले वादे करने का आरोप लगाया था. जिसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर राहुल ट्वीट कहा था कि यह "कुर्सी बचाओ बजट है. सहयोगियों को खुश करने वाला है. वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि मोदी सरकार का 'नकलची बजट' कांग्रेस के न्याय एजेंडे की भी ठीक से नकल नहीं कर सका! मोदी सरकार का बजट अपने गठबंधन सहयोगियों को धोखा देने के लिए आधी-अधूरी 'रेवड़ियां' बांट रहा है ताकि एनडीए बच जाए. यह 'देश की तरक्की' का बजट नहीं है, यह 'मोदी सरकार बचाओ' का बजट है!"
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के इन्हीं आरोपों पर आज बारी थी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की. आज निर्मला सीतारमण नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित तमाम विपक्षी नेताओं पर जमकर बरसी. निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के आरोपों को अपमानजनक करार देते हुए कहा कि कांग्रेस लोगों के बीच मनगढ़ंत धारणा गढ़ने में लगी है. विभिन्न राज्यों के नाम नहीं लेने पर वित्त मंत्री ने कहा है कि आपने अपने समय में कितने राज्यों का नाम लिया था. हमने भी बजट में कई राज्यों का नाम नहीं लिया, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन राज्यों के लिए बजट में कुछ भी नहीं है.
राज्यसभा में बोलते हुए, वित्त मंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष, विशेष रूप से एक वरिष्ठ नेता, मल्लिकार्जुन खड़गे ने कल बजट के बारे में जो सुना, उसे कहने के लिए खड़े हुए. उन्होंने कहा कि मैंने कई राज्यों का नाम नहीं लिया है और केवल दो राज्यों के बारे में बात की है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस देश में लंबे समय तक सत्ता में रही और उन्होंने इतने बजट पेश किए हैं कि उन्हें साफ पता होगा कि हर बजट में आपको इस देश के हर राज्य का नाम लेने का मौका नहीं मिलता है.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कैबिनेट ने महाराष्ट्र के वधवन में एक बंदरगाह स्थापित करने का फैसला किया, लेकिन कल बजट में महाराष्ट्र का नाम शामिल नहीं किया गया. क्या इसका मतलब यह है कि महाराष्ट्र उपेक्षित महसूस करता है? वित्त मंत्री ने कहा कि इस परियोजना के लिए महाराष्ट्र के लिए 76 हजार करोड़ रुपये की घोषणा की गई है. महाराष्ट्र का नाम वोट ऑन अकाउंट में नहीं लिया गया. कल भी राज्य का नाम नहीं लिया गया; क्या इसका मतलब यह है कि राज्य की उपेक्षा की गई?
उन्होंने आगे कहा कि और मैं कई अलग-अलग राज्यों के नाम ले सकती हूं, जिनके पास कई बड़ी परियोजनाएं हैं. अगर भाषण में किसी विशेष राज्य का नाम नहीं है, तो क्या इसका मतलब यह है कि भारत सरकार की योजनाएं और कार्यक्रम, विश्व बैंक, एडीबी, एआईबी और इसी तरह से मिलने वाली बाहरी सहायता, इन राज्यों को नहीं मिलती? सीतारमण ने कहा कि मैं जिम्मेदारी के साथ कह रही हूं कि यह कांग्रेस के नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टियों का लोगों को यह गलत धारणा देने का 'जानबूझकर प्रयास' है कि उनके राज्यों को धन या योजनाएं आवंटित नहीं की गई हैं.
कांग्रेस को चुनौती देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि मैं कांग्रेस पार्टी को चुनौती देती हूं कि उन्होंने जितने भी बजट भाषण दिए हैं. क्या उन्होंने अपने प्रत्येक बजट भाषण में देश के हर राज्य का नाम लिया है? यह एक अपमानजनक आरोप है. उन्होंने कहा कि यह तब हुआ जब मल्लिकार्जुन खड़गे ने कल पेश किए गए बजट की निंदा की और दावा किया कि आंध्र प्रदेश और बिहार के अलावा किसी अन्य राज्य को कुछ नहीं मिला. दरअसल खड़गे ने कहा था कि "सबके थाली खाली और सिर्फ दो के थाली में पकौड़े और जलेबी. ये दो राज्य छोड़ कर, किसी को कुछ नहीं मिला. न तो तमिलनाडु, केरल और न ही कर्नाटक को कुछ मिला. न ही महाराष्ट्र, न पंजाब या राजस्थान और न ही छत्तीसगढ़ को.
उन्होंने आगे कहा था कि यहां तक कि दिल्ली को भी कुछ नहीं मिला और न ही ओडिशा को. मैंने अब तक इस तरह का बजट नहीं देखा है. यह बजट केवल कुछ लोगों को खुश रखने के लिए पेश किया गया है और यह सब उनकी कुर्सी बचाने के लिए किया गया है. हम इस बजट की निंदा करते हैं और इसका विरोध करते हैं. पूरा भारत ब्लॉक इसकी निंदा करता है.
इस बीच, विपक्षी भारत ब्लॉक के सांसदों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा मंगलवार को पेश किए गए केंद्रीय बजट के खिलाफ बुधवार को संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया. संसद भवन में विपक्ष के नेताओं ने नारे लगाए. प्रदर्शन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, टीएमसी सांसद डोला सेन ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया.