कौन है सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य, जिसने पहले मजदूरों का डेटा जुटाया, फिर प्रदर्शन को उग्र बनाया...

Abhishek Chaturvedi 19 Apr 2026 09:42: PM 2 Mins
कौन है सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य, जिसने पहले मजदूरों का डेटा जुटाया, फिर प्रदर्शन को उग्र बनाया...

Noida Protest: यह तस्वीर गौर से देखिए, ये वो इंसान है, जिस पर एक लाख रुपए का इनाम पुलिस ने घोषित किया था. जिसने नोएडा में मजदूरों के नाम पर नई चिंगारी भड़काने की कोशिश की. घटना के 5 दिन बाद तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली स्टेशन से यूपी एसटीएफ और गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट की पुलिस हुलिया बदलने वाले इस आदित्य आनंद को उठा लाती है, और उसके बाद जो खुलासा होता है, वो हर किसी को दंग कर देता है...

कौन है आदित्य आनंद

  • बिहार के हाजीपुर का रहने वाला 28 साल के आदित्य ने जमशेदपुर NIT से बीटेक की पढ़ाई की है
  • 2020 में उसने नोएडा की एक MNC कंपनी में नौकरी की, फिर गुरुग्राम में जाकर नौकरी करने लगा
  • साल 2023 में उसकी मुलाकात भगत सिंह जन अधिकार यात्रा में रुपेश रॉय नाम के व्यक्ति से होती है
  • रुपेश रॉय की मदद से वो मजदूर बिगुल के सभी सीनियर नेताओं के संपर्क में आता है, पहचान बनाता है
  • 30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच उसके फ्लैट पर मीटिंग होती है, प्लानिंग बनती है, और फिर आंदोलन होता है

चूंकि रुपेश रॉय बिहार के छपरा का रहने वाला ऑटो चालक था, और लंबे वक्त से मजदूरों के बीच अपनी पकड़ बना रहा था, और उसके साथ गोपलगंज की मनीषा चौहान भी जुड़ी थी, इसलिए जैसे ही इन्हें टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट आदित्य आनंद मिला, इन्होंने प्लानिंग शुरू कर दी...मजदूरों का डेटा जुटाकर बकायदा ये पता लगाया कि कितने मजदूरों को आंदोलन के नाम पर सड़क पर उतारा जा सकता है, कैसे इसे उग्र किया जा सकता है, कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती पैदा की जा सकती है, माहौल बिगाड़कर अपने मंसूबे को कामयाब किया जा सकता है...

इसके लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर इन्होंने पहले भड़काऊ पोस्ट डाले, लोगों को बुलाया, कई मजदूर संगठनों से संपर्क किया, उसके बाद प्रदर्शन पहले क्यूआर कोड भेजकर मजदूरों को ग्रुप में जोड़ा, भड़काऊ भाषण देकर उन्हें उकसाया और हरियाणा में वेतन बढ़ने की बात कहकर मजदूरों को सड़क पर खड़ा कर दिया, इनके शातिर चाल का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि Proudindiannavi और @Mir_Ilyas_INC नाम के सोशल मीडिया अकाउंट्स को VPN के जरिए चलाया गया, ताकि लोकेशन छिपाई जा सके.

यहां तक कि जो 66 लोग पकड़े गए उनमें से 45 लोगों के बाहरी होने की ख़बरें भी सामने आई है, जिसका मतलब ये हो सकता है कि मजदूरों की भीड़ में मजदूर बनकर कोई और घुसा था, जिसकी कुंडली अब पुलिस खंगाल रही है, सीएम योगी आदित्यनाथ ने चूंकि इस घटना के बाद औद्योगिक अशांति फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करने और नक्सलवाद को दोबारा से जिंदा करने की साजिश की ओर इशारा किया था, इसलिए मजदूरों के इस प्रदर्शन को कई नजरिए से देखा जा रहा है...

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या इन्हें कोई बाहर बैठकर ऑपरेट कर रहा था, आखिर बिहार के रहने वाले आदित्य आनंद ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़ ऐसा रास्ता क्यों चुना, जिसकी मंजिल सलाखों तक पहुंच गई...बीजेपी विधायक नंदकिशोर गुर्जर का दावा है अगर पुलिस अलर्ट नहीं होती तो साल 1990 जैसी घटना हो सकती है, जो कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के साथ हुई थी, इस घटना पर सबके अपने-अपने दावे हैं, पुलिस की जांच एक तरफ है तो दूसरी तरफ मजदूरों के अधिकार की बात है...आंदोलन के बाद से यूपी का श्रम विभाग एक्शन मोड में दिख रहा है, नियम न मानने वाले 43 ठेकेदारों को उसने नोटिस जारी किया है, जबकि 10 ठेकेदारों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं...

aditya anand noida protest noida labor protest noida violence

Recent News