नई दिल्ली: हरियाणा के पंचकूला में एक दुखद घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया. मंगलवार सुबह, देहरादून के एक परिवार के सात लोगों के शव एक कार में मिले. पुलिस को शक है कि यह सामूहिक आत्महत्या का मामला है, जिसमें परिवार ने जहर खाकर अपनी जान दे दी. इस कदम के पीछे भारी कर्ज और आर्थिक परेशानियों का होना बताया जा रहा है. मृतकों में 42 साल के प्रवीण मित्तल, उनके माता-पिता, पत्नी और तीन नाबालिग बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) शामिल हैं. यह परिवार पंचकूला में एक धार्मिक आयोजन, बागेश्वर धाम के कार्यक्रम में शामिल होने आया था.
प्रवीण मित्तल, जो पहले एक व्यवसायी थे, भारी कर्ज में डूबे हुए थे. उनकी कुल कर्ज की राशि 20 करोड़ रुपये से ज्यादा थी. हिमाचल प्रदेश के बद्दी में उनकी स्क्रैप फैक्ट्री थी, जो कर्ज न चुका पाने की वजह से बैंक ने जब्त कर ली थी. इसके अलावा, उनके दो फ्लैट और कई गाड़ियां भी बैंक ने ले ली थीं. कर्जदाताओं की लगातार धमकियों से बचने के लिए प्रवीण और उनका परिवार बार-बार जगह बदल रहा था. वे देहरादून से पंचकूला, फिर खरड़ (मोहाली) और पिंजौर जैसी जगहों पर रह चुके थे. हाल ही में, वे पंचकूला के साकेतड़ी गांव के पास एक किराए के मकान में रह रहे थे.
पुलिस के मुताबिक, सभी सात लोग एक हुंडई औरा कार में मृत पाए गए. कार के शीशे ढके हुए थे और अंदर उल्टी के निशान मिले, जिससे जहर खाने की आशंका पुख्ता हुई. एक स्थानीय निवासी, पुनीत राणा, ने सबसे पहले कार को देखा. उन्होंने बताया कि प्रवीण ने उनसे कहा था कि वे होटल नहीं ढूंढ पाए, इसलिए कार में ही रात बिताने का फैसला किया. कुछ घंटों बाद, जब पुनीत ने कार की जांच की, तो उन्हें छह लोग बेहोश मिले और प्रवीण ने बताया कि उन्होंने भी जहर खा लिया है और वे कर्ज में डूबे हुए हैं.
प्रवीण के आखिरी शब्द थे, "मैं भी पांच मिनट में मर जाऊंगा." पुनीत ने उन्हें कार से निकाला और पानी पिलाने की कोशिश की, लेकिन प्रवीण की हालत बिगड़ गई और अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई. कार में एक सुसाइड नोट भी मिला, जिसमें प्रवीण ने अपने चचेरे भाई संदीप अग्रवाल से अंतिम संस्कार करने की गुजारिश की थी. संदीप ने बताया कि उन्होंने पांच दिन पहले प्रवीण से बात की थी, लेकिन उन्हें इस योजना की कोई जानकारी नहीं थी.
प्रवीण पहले एक स्क्रैप फैक्ट्री चलाते थे, लेकिन कर्ज बढ़ने के बाद वे टैक्सी चालक बन गए. जिस कार में यह हादसा हुआ, वह देहरादून के जी.एस. नेगी के नाम पर थी, जिन्होंने प्रवीण की मदद के लिए गाड़ी फाइनेंस करवाई थी. प्रवीण का परिवार पिछले कुछ सालों से गुमनामी में जी रहा था और लोगों से ज्यादा संपर्क नहीं रखता था.
पंचकूला पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए पांच टीमें बनाई हैं. ये टीमें परिवार के फोन रिकॉर्ड, सोशल मीडिया और आर्थिक स्थिति की जांच कर रही हैं. एक टीम देहरादून भी गई है ताकि कार और परिवार के बारे में और जानकारी जुटाई जा सके. डीसीपी अमित दहिया ने बताया, "यह बहुत दुखद घटना है. शुरुआती जांच में आत्महत्या की बात सामने आई है. कार में उल्टी और खाने के निशान मिले हैं. हम हर पहलू से जांच कर रहे हैं."