Jantar Mantar Protest : दिल्ली के जंतर-मंतर पर देशभर से पहुंचे छात्र पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था की मांग कर रहे हैं. युवाओं का कहना है कि हर बार परीक्षा रद्द होने की कीमत लाखों अभ्यर्थियों को चुकानी पड़ती है. इसी बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक पुराना मामला फिर चर्चा में है, क्योंकि भाजपा के सहयोगी दलों के दो मौजूदा विधायक लंबे समय से पेपर लीक मामले में आरोपी हैं. हालांकि, दोनों नेताओं ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह झूठा बताया है और मामला अभी अदालत में विचाराधीन है.
पहला नाम गाजीपुर की जखनियां सीट से सुभासपा विधायक बेदीराम का है, जबकि दूसरा नाम भदोही की ज्ञानपुर सीट से निषाद पार्टी विधायक विपुल दुबे का. दोनों का नाम वर्ष 2006 के रेलवे ग्रुप-डी भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में सामने आया था. पेपर लीक की पुष्टि के बाद रेलवे को पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी और यूपी एसटीएफ ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की थी.
सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार, बेदीराम के खिलाफ रेलवे भर्ती पेपर लीक से जुड़े पांच मामले, एमपीपीएससी परीक्षा से जुड़े दो मामले और पुलिस भर्ती परीक्षा से जुड़ा एक मामला दर्ज है. वहीं, विपुल दुबे पर भी इसी प्रकरण में मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें गैंगस्टर एक्ट का मामला भी शामिल है. दोनों नेताओं का दावा है कि उन्हें राजनीतिक कारणों से झूठा फंसाया गया है.
साल 2024 में एमपी-एमएलए कोर्ट ने इस मामले में आरोप तय किए और मुकदमा अभी भी लंबित है. ऐसे में जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ उठ रही आवाजों के बीच एक बड़ा सवाल फिर सामने है, जब पेपर लीक के आरोप झेल रहे लोग विधानसभा तक पहुंच जाते हैं, तो परीक्षा माफियाओं में कानून का डर कैसे पैदा होगा. इसका अंतिम जवाब अदालत के फैसले से ही तय होगा.