नई दिल्ली: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए संबोधन के एक हिस्से पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच नया सियासी संग्राम छिड़ गया है। अपने भाषण में आंतरिक सुरक्षा का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने जंगलों में 'हथियारबंद नक्सलियों' का खात्मा कर दिया है, लेकिन अब समाज में मौजूद 'दिमागी नक्सलियों' (Dimaagi Naxals) को पहचानकर उन्हें समाज से अलग-थलग करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी पर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले चार दशकों में नक्सलवाद और माओवादी हिंसा ने लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद किया और 3,500 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को अपनी जान गंवानी पड़ी। 2014 के बाद सरकार के ठोस कदमों से आज माओवादी हिंसा अपनी अंतिम सांसें गिन रही है।
पीएम मोदी ने आगे कहा, "सालों तक माओवादी सोच वाले लोग सत्ता के गलियारों और सरकारी कमेटियों में सलाहकार बनकर नीतियों को प्रभावित करते रहे। हथियारबंद नक्सली तो खत्म हो गए, लेकिन 'दिमागी नक्सली' अभी भी मौके की तलाश में हैं। वे समाज को हिंसा, अशांति और गलत दिशा में धकेलने के हथकंडे अपना रहे हैं। हमें इन दिमागी नक्सलियों की पहचान करनी होगी और उन्हें अलग-थलग करके युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ना होगा।"
प्रधानमंत्री के इस बयान पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर कहा, "पहले वे अपने राजनीतिक विरोधियों को 'अर्बन नक्सल' कहते थे, अब वे उन्हें 'दिमागी नक्सल' कह रहे हैं। यह उनकी बढ़ती हताशा और बौखलाहट का साफ संकेत है।"
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सरकार से असहमत हर व्यक्ति नक्सली है? उन्होंने कहा कि लाल किले की प्राचीर से देश को जोड़ने वाली बातें होनी चाहिए, न कि इस तरह के विभाजनकारी शब्दों का प्रयोग।
कांग्रेस मुख्यालय में झंडारोहण के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी प्रधानमंत्री के भाषण पर तंज कसते हुए कहा कि लाल किले से सिर्फ अपनी पीठ थपथपाने और पिछले 70 सालों के योगदान को नकारने की कोशिश की गई है। खड़गे ने कहा कि देश के निर्माण में भोजन, शिक्षा और रोजगार (मनरेगा) जैसे बुनियादी अधिकार पूर्ववर्ती सरकारों ने दिए, जिसका श्रेय लेने की कोशिश मौजूदा सरकार कर रही है।