गाजीपुर: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई और मेटा के सोशल मीडिया निगरानी तंत्र ने एक 21 वर्षीय युवती की जान बचा ली. सादात थाना क्षेत्र के कुन्दर्शीपुर गांव में 11 अगस्त की रात एक युवती ने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट कर आत्महत्या का प्रयास करने की बात कही. इस सूचना पर तुरंत हरकत में आई पुलिस ने मात्र 18 मिनट में 12 किलोमीटर की दूरी तय कर युवती को अस्पताल पहुंचाया और उसकी जान बचाई.
इंस्टाग्राम पोस्ट से शुरू हुई कार्रवाई
रात 11:34 बजे युवती ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह दवाइयों को पानी में घोलकर पीते हुए दिख रही थी. वीडियो के साथ उसने लिखा कि उसे जहर खाने के लिए मजबूर किया गया. मेटा के मॉनिटरिंग सिस्टम ने इस पोस्ट को तुरंत पकड़ा और लखनऊ में यूपी पुलिस मुख्यालय के सोशल मीडिया सेंटर को ईमेल अलर्ट भेजा. डीजीपी राजीव कृष्ण के निर्देश पर गाजीपुर पुलिस को सूचना दी गई, जिसमें युवती का मोबाइल नंबर और लोकेशन की जानकारी शामिल थी.
पुलिस की तेज कार्रवाई
सादात थाना प्रभारी ने महिला आरक्षियों और पुलिसकर्मियों की टीम के साथ तुरंत कार्रवाई शुरू की. रात के अंधेरे में 12 किलोमीटर की दूरी को 18 मिनट में तय कर पुलिस लड़की के घर पहुंची. वहां वह कमरे में बेहोशी की हालत में मिली. परिजनों की मदद से दरवाजा खोलकर उसे तत्काल सादात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार कर उसकी जान बचाई, और अब उसकी हालत स्थिर है.
मानसिक तनाव में उठाया कदम
पूछताछ में युवती ने बताया कि वह पहले दिल्ली में पानी सप्लाई के काम में थी, जहाँ उसकी मुलाकात प्रयागराज के एक युवक से हुई थी. दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन नौकरी छूटने के बाद वह अपने गांव लौट आई. कुछ समय बाद युवक ने उससे संपर्क तोड़ लिया, जिसके कारण मानसिक तनाव में उसने आत्महत्या का प्रयास किया. पुलिस ने युवती की काउंसलिंग की, और उसने भविष्य में ऐसा कदम न उठाने का वचन दिया.
परिजनों और पुलिस का आभार
युवती के परिजनों ने पुलिस की त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई की सराहना की. उन्होंने मेटा और यूपी पुलिस के समन्वय की भी प्रशंसा की, जिसने समय पर हस्तक्षेप कर उनकी बेटी की जान बचाई. यूपी पुलिस और मेटा के बीच 2022 से एक विशेष सहयोग व्यवस्था चल रही है, जिसके तहत फेसबुक और इंस्टाग्राम पर आत्महत्या से संबंधित पोस्ट की निगरानी की जाती है. मेटा ऐसी पोस्ट की जानकारी तुरंत पुलिस को ईमेल और फोन के जरिए देता है. इस व्यवस्था के तहत 1 जनवरी 2023 से 10 अगस्त 2025 तक 1241 लोगों की जान बचाई जा चुकी है.
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