उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित श्री बड़ा गणेश मंदिर में एक पोस्टर ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. इस पोस्टर में महिलाओं के पहनावे को लेकर पांच सवाल उठाए गए हैं, जिसमें 'सनातन पोशाक' अपनाने की सलाह दी गई है. इसने भक्तों, मंदिर प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच तीखी बहस छेड़ दी है, लेकिन पोस्टर लगाने वाले की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है.
पोस्टर में माता-पिता से सवाल
पोस्टर में माता-पिता से पूछा गया है कि क्या वे अपनी बेटियों को 'अनुचित' और 'अश्लील' कपड़े पहनने की छूट देकर गलत संस्कार दे रहे हैं. इसमें यह भी सवाल किया गया है कि क्या 'छोटे' कपड़े पहनना आधुनिकता का प्रतीक माना जाता है. मंदिर समिति और जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उन्हें पोस्टर लगाने की जानकारी नहीं है, लेकिन इसने उज्जैन में चर्चा का माहौल बना दिया है.
पारंपरिक पोशाक की अपील
उज्जैन के कई मंदिरों में पहले से ही भक्तों से पारंपरिक पोशाक में आने की अपील की जाती है. महाकाल मंदिर के गर्भगृह में यह नियम पहले से लागू है, और दक्षिण भारतीय मंदिरों में भी ऐसी प्रथा आम है. मंदिर के पुजारी समय-समय पर भक्तों को मर्यादित पोशाक में आने की सलाह देते रहे हैं.
महाकाल पुजारी का समर्थन
पोस्टर में 'जनजागरण समिति' का जिक्र है, जिसके आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि इसके पीछे कोई सामाजिक संगठन हो सकता है, हालांकि किसी ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली. ऑल इंडिया प्रीस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष और महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश शर्मा ने इस संदेश का समर्थन किया है. उन्होंने कहा, "मंदिर आस्था और सम्मान का स्थान है. सभी भक्तों, खासकर युवा महिलाओं को, मर्यादित पोशाक में आना चाहिए. यह कई मंदिरों की परंपरा रही है."
पोस्टर में उठाए गए पांच सवाल:
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