पेरिस: फ्रांस में बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन के खर्च के खिलाफ चल रहे राष्ट्रव्यापी आंदोलन ने हिंसक रूप धारण कर लिया है. शनिवार और रविवार को पेरिस, बोरदो, ल्योन और मार्सैई समेत कई शहरों में 5.5 लाख से ज्यादा प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे. नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने एप्पल, लुई विटॉन और हर्मीस जैसे लक्जरी स्टोर्स में तोड़फोड़ और लूटपाट की.
क्या-क्या हुआ?
बोरदो में उपद्रवियों ने एप्पल के फ्लैगशिप स्टोर और लुई विटॉन व हर्मीस के शोरूम के शीशे तोड़कर दुकानों को लूट लिया. मार्सैई की नगर निगम इमारत में घुसकर राष्ट्रीय प्रतीक ‘मारियाने’ की मूर्ति तोड़ दी, टीवी नष्ट किए और दीवारों पर अराजकतावादी निशान बनाए. ल्योन के प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र को आग के हवाले कर दिया गया. पेरिस में सड़कों पर इमारतें, रेस्टोरेंट और गाड़ियां जलाई गईं.
कुछ प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के आधिकारिक आवास एलिसी पैलेस पर धावा बोलने की चेतावनी भी दी. लिमोज टाउन हॉल का 1883 में बना 143 साल पुराना घंटाघर भी आग की लपटों में जलकर ढह गया.
आंदोलन में कौन शामिल?
शुरुआत में छात्र आंदोलन के रूप में शुरू हुआ यह विरोध अब जन-आंदोलन बन गया है. छात्र, शिक्षक, ट्रेड यूनियन, मजदूर, किसान, पेंशनभोगी और येलो वेस्ट आंदोलन के कार्यकर्ता एकजुट हो गए हैं. मांगें हैं, जीवन-यापन खर्च नियंत्रित करना, शिक्षा बजट बढ़ाना, शिक्षकों के वेतन में बढ़ोतरी, पेंशन सुरक्षा और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती वापस लेना.
सरकार की प्रतिक्रिया
गृह मंत्रालय के अनुसार, हिंसा के आरोप में करीब 400 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें पेरिस से अकेले 110 शामिल हैं. गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज और प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने वामपंथी उग्रवादी गुटों और असामाजिक तत्वों को जिम्मेदार ठहराया. राष्ट्रपति मैक्रॉन ने कहा, ''गणराज्य में हिंसा का कोई स्थान नहीं. तोड़फोड़ और लूटपाट करने वालों को कड़ी सजा दी जाएगी.'' दंगा-रोधी पुलिस ने आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया है. प्रमुख शहरों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं.